सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से लाइन पर आया FSSAI
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से लाइन पर आया FSSAI
डिब्बाबंद और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदने वालों के लिए आने वाले समय में पैकेट का पिछला हिस्सा ही नहीं, बल्कि सामने का हिस्सा भी काफी अहम होने वाला है. ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी देने के मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें चेतावनी लेबलिंग के नियमों को एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है. ड्राफ्ट नियम तैयार करने के लिए 4 महीने और कंपनियों को नियम लागू करने के लिए 365 दिन की अवधि देने की बात कही गई है.
क्या बदलेगा पैकेट पर?
नए प्रस्ताव के तहत खाद्य पदार्थों में ज्यादा मात्रा में चीनी, नमक या वसा होने की जानकारी उपभोक्ताओं को ज्यादा स्पष्ट तरीके से दी जाएगी. इसका मकसद यह है कि कोई व्यक्ति सामान खरीदने से पहले ही आसानी से समझ सके कि उसमें इन पोषक तत्वों की मात्रा कितनी है. अभी कई उत्पादों में पोषण संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में होती है. नए बदलाव का जोर ऐसी जानकारी को उपभोक्ता के लिए ज्यादा स्पष्ट और आसानी से दिखाई देने वाला बनाने पर है.
आर्टिफिशियल स्वीटनर पर भी सामने चेतावनी
सिर्फ ज्यादा चीनी, नमक और वसा ही नहीं, बल्कि नॉन-कैलोरिक स्वीटनर यानी कृत्रिम मिठास के इस्तेमाल को लेकर भी फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी देने का प्रस्ताव है. अगर किसी खाद्य या पेय पदार्थ में नॉन-कैलोरिक स्वीटनर मौजूद है तो पैकेट के सामने 'CONTAIN NON CALORIC SWEETENER' लिखना होगा. अभी ऐसी जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में दी जाती है.
एक साथ लागू होंगे नए नियम
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बजाय एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया है. ड्राफ्ट नियम तैयार करने के लिए 4 महीने की समयसीमा तय की गई है. इसके बाद खाद्य कंपनियों और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को बदलाव लागू करने के लिए 365 दिनों की अवधि दी जाएगी. यानी नियम अधिसूचित होने के बाद कंपनियों को पैकेजिंग में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.
हर शुगर को हाई शुगर कहना आसान नहीं
FSSAI ने यह भी बताया कि खाद्य पदार्थों को सिर्फ उनकी कुल चीनी के आधार पर 'हाई शुगर' घोषित करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं. मसलन, फलों और दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद चीनी और किसी उत्पाद को बनाने के दौरान अलग से मिलाई गई चीनी एक जैसी नहीं होती. यानी किसी खाद्य पदार्थ में मौजूद चीनी का स्रोत भी महत्वपूर्ण है. FSSAI ने इसी वजह से 'प्राकृतिक' और 'अधिक चीनी' वाले खाद्य पदार्थों के वर्गीकरण की चुनौती का उल्लेख किया है.
चेतावनी लेबल और वेज-नॉनवेज निशान अलग होंगे
पैकेट पर मौजूद वेजिटेरियन/नॉन-वेजिटेरियन निशान और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चेतावनी को अलग-अलग तरीके से दिखाया जाएगा. दोनों के आकार और रंग में अंतर रखा जाएगा, ताकि उपभोक्ता इन्हें आसानी से पहचान सकें.
स्कूलों में भी स्वस्थ भोजन पर जोर
FSSAI ने स्कूलों में खाद्य सुरक्षा और पोषण को लेकर पहले से चल रही व्यवस्था की जानकारी भी कोर्ट को दी है. स्कूलों में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम 2020 में जारी किए जा चुके हैं. इनमें स्कूलों में भोजन तैयार करने से जुड़े मानक शामिल हैं. इसके अलावा FSSAI और शिक्षा मंत्रालय की ओर से छात्रों के लिए 'Eat Right Campaign' चलाया जा रहा है. देशभर के स्कूलों के पाठ्यक्रम में खाद्य सुरक्षा, पोषण संबंधी जानकारी और स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए 'Eat Right India' कार्यक्रम से जुड़ा अध्याय शामिल किया गया है. स्कूलों को FSSAI Eat Right School प्रमाणन लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन का बेहतर माहौल मिल सके.
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या?
आने वाले समय में पैकेट वाला खाना खरीदते समय आपको सिर्फ ब्रांड या स्वाद देखकर फैसला नहीं करना होगा. पैकेट के सामने ही यह समझने में मदद मिल सकती है कि उसमें ज्यादा चीनी, नमक, वसा या कृत्रिम मिठास मौजूद है या नहीं.
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