TB
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हरियाणा सरकार ने टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ चलाए जा रहे 100 दिन के 'टीबी मुक्त भारत अभियान' (फेज-2) में बड़ी सफलता हासिल की है. 24 मार्च 2026 से शुरू हुए इस अभियान के दौरान अब तक 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई है. यह अभियान विश्व टीबी दिवस के मौके पर शुरू किया गया था.
AI तकनीक से गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम
इस बार अभियान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया. स्वास्थ्य विभाग ने AI से लैस हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें तैनात कीं, जिनकी मदद से दूर-दराज के इलाकों में भी लोगों की तेजी से जांच की गई. इसके अलावा 'कफ अगेंस्ट टीबी (CATB)' नाम का मोबाइल ऐप भी इस्तेमाल किया गया. यह ऐप स्मार्टफोन के जरिए व्यक्ति की खांसी की आवाज का विश्लेषण कर बताता है कि उसे आगे टीबी की जांच की जरूरत है या नहीं.
2,111 हाई-रिस्क गांवों और वार्डों पर रहा फोकस
स्वास्थ्य विभाग ने वल्नरेबिलिटी मैपिंग (VM-TB) के जरिए ऐसे 2,111 गांवों और शहरी वार्डों की पहचान की, जहां टीबी फैलने का खतरा ज्यादा था. इन इलाकों में विशेष अभियान चलाकर लोगों की जांच की गई. सरकार का कहना है कि इस रणनीति से ऐसे कई मरीज सामने आए, जिनमें बीमारी के शुरुआती लक्षण भी नहीं थे. अगर समय पर जांच नहीं होती तो ये मरीज लंबे समय तक बिना इलाज के रह सकते थे.
4.73 लाख लोगों की जांच, साढ़े 2 लाख से ज्यादा एक्स-रे
24 मार्च से 5 जुलाई के बीच स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में 3,914 स्वास्थ्य शिविर लगाए. इनमें 2,854 शिविर हाई-रिस्क क्षेत्रों में आयोजित किए गए. अभियान के दौरान 4,73,197 लोगों की स्क्रीनिंग की गई. साथ ही 2,25,321 चेस्ट एक्स-रे और करीब 1.25 लाख NAAT (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट) किए गए. इन जांचों के आधार पर 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई. टीबी मरीजों के इलाज के दौरान पोषण का विशेष ध्यान रखा गया. सरकार ने 23,962 पोषण किट वितरित किए, ताकि मरीजों को बेहतर खानपान मिल सके और वे जल्दी स्वस्थ हो सकें.
मोबाइल मेडिकल यूनिट और जनप्रतिनिधियों का भी मिला साथ
अभियान में 65 'निक्षय वाहन' यानी मोबाइल मेडिकल यूनिट भी शामिल किए गए. ये वाहन दूर-दराज और सुविधाओं से वंचित इलाकों में पहुंचकर लोगों की जांच और शुरुआती इलाज की सुविधा दे रहे हैं. जांच को आयुष्मान आरोग्य शिविरों से भी जोड़ा गया है. इन शिविरों में लोगों की टीबी के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एनीमिया और अन्य बीमारियों की भी जांच की जा रही है.
टीबी क्या है और कैसे फैलती है?
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टीरिया से होती है. यह बीमारी सबसे ज्यादा फेफड़ों (पल्मोनरी टीबी) को प्रभावित करती है, लेकिन यह हड्डियों, लिम्फ नोड्स, दिमाग, रीढ़, किडनी और शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है. टीबी हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. जब टीबी का मरीज खांसता, छींकता, बोलता है, तो उसके मुंह से बैक्टीरिया वाली छोटी-छोटी बूंदें (ड्रॉपलेट्स) हवा में फैल जाती हैं.
टीबी के प्रमुख लक्षण
2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी
खांसी में बलगम या खून आना
लगातार बुखार, खासकर शाम या रात में
रात में ज्यादा पसीना आना
तेजी से वजन घटना
भूख कम लगना
कमजोरी और थकान
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