scorecardresearch

Speech Therapy: आपका भी बच्चा है हकलाता, तो इन 3 एक्सरसाइज से दूर हो सकती है परेशानी

कई बार लोग हकलाने का मज़ाक बनाते हैं जिसके कारण बच्चे का कॉन्फिडेंस काफी ज्यादा लो हो जाता है. ऐसे में उनकी पर्सनेलिटी भी ठीक से डेवलप नहीं हो पाती है.

Child with low confidence due to stammering Child with low confidence due to stammering

बचपन में बच्चों के विकास के दौरान कई बार बोलते समय वह हकलाते हैं. कई बार लोग हकलाने का मज़ाक बनाते हैं जिसके कारण उनका कॉन्फिडेंस काफी ज्यादा लो हो जाता है. ऐसे में उनकी पर्सनेलिटी भी ठीक से डेवलप नहीं हो पाती है. बचपन में उड़ाया गया यह मज़ाक जीवनभर के लिए उनका कॉन्फिडेंस छीन सकता है. 

कई बार लोग यह भी सोचते है कि हकलाना कोई बीमारी हो सकती है, लेकिन यह कोई गंभीर बीमारी नहीं बल्कि केवल एक डिसऑर्डर है. जिसे आसानी के साथ ही ठीक किया जा सकता है. 

क्यों हकलाते हैं बच्चें?
बच्चों के इस हकलाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे उसको अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं देना, जब भी वह अक्सर अपनी बात रखने की कोशिश करे तो उसे टोक या डांट कर रोक देना. या फिर कोई जेनेटिक कारण, या फिर कोई न्यूरोलॉडिकल वजह. 

अच्छी बात यह है कि हकलाने की परेशानी को स्पीच थेरेपी की मदद से आसानी से दूर किया जा सकता है. इसके लिए आप आसानी के साथ बच्चों के साथ यहां बताईं एक्सरसाइज करवा सकते हैं. जिससे यह परेशानी दूर हो सकती है.

टॉकिंग प्रैक्टिस
कई बार बच्चे जल्दी-जल्दी बोलते हैं, ऐसे में उनका वाक्य स्पष्ट रूप से बाहर नहीं आ पाता या अटक जाता है. इसलिए उन्हें बताएं कि किस तरह अपनी बात को बोलना है. पहले मन में विचार बना लें कि क्या बोलना. उसके बाद जिस बात को वह रखना चाहते हैं, उसे धीरे-धीरे बोलें. जिससे वह अपनी बात स्पष्ट रूप से रख पाएंगे और वाक्य भी नहीं कटेगा.

मिरर प्रैक्टिस
मिरर प्रैक्टिस की मदद से खुद में कॉन्फिडेंस पैदा किया जा सकता है. अगर बच्चे में कॉन्फिडेंस की कमी है, जिसके कारण वह अपनी बात लोगों के सामने नहीं पाता है. ऐसे में उसके लिए मिरर प्रैक्टिस एक काफी अच्छी एक्सरसाइज है. इसमें केवल बच्चे को मिरर के सामने खड़े होकर कुछ बाते करने को कहें. इससे बच्चा अपनी बॉडी लैंग्वेज को देख सकेगा, साथ ही कॉन्फिडेंस पैदा करते हुए बोलने के तरीके को भी सुधार पाएगा.

लाउड रीडिंग
यह काफी आसान लेकिन प्रभावशाली मेथड है. इसमें बच्चे के जोर-जोर से कोई भी बुक पढ़ने को कहें. साथ ही इस दौरान उसे बिल्कुल न टोकें. इससे उसमें अपनी बात को कॉन्फिडेंस के साथ लोगों के सामने रखने की क्षमता पैदा होगी. साथ ही हकलाहत भी दूर होगी. 

अगर समस्या ज्यादा गंभीर लगे तो डॉक्टरी सलाह लेने में किसी भी प्रकार की देरी न करें. क्योंकि प्रोफेशन द्वारा कराई गई स्पीच थेरेपी बच्चे के अनुसार ही होगी. साथ ही अगर कोई और कारण होगा तो उसको भी जल्द दूर किया जा सकेगा.