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22 तरह के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवा Keytruda क्या है, कैसे करती है काम और क्यों आम मरीज की पहुंच से बाहर

Keytruda का असली नाम पेम्ब्रोलिज़ुमैब (Pembrolizumab) है. इसे अमेरिकी दवा कंपनी Merck & Co. (MSD) बनाती है. इस दवा को पहली बार 2014 में अमेरिका की FDA ने स्किन कैंसर (मेलानोमा) के इलाज के लिए मंजूरी दी थी.

Keytruda Keytruda
हाइलाइट्स
  • कैसे काम करती है Keytruda?

  • किन-किन कैंसर में होती है इस्तेमाल?

कैंसर दुनिया भर में मौत का दूसरा प्रमुख कारण बना हुआ है. WHO के मुताबिक, हर साल करीब 10 मिलियन लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है. 2030 तक यह संख्या 13 मिलियन तक बढ़ने का अनुमान है. ऐसे में कैंसर के इलाज को लेकर हर दिन कोई न दवा बनाई जा रही है या रिसर्च की जा रही है. ऐसी ही एक दवा है Keytruda. दुनियाभर में 22 तरह के कैंसर का इलाज करने वाली यह जादुई दवा महंगी होने के कारण ज्यादातर मरीजों की पहुंच से बाहर है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह दवा क्या है, कैसे काम करती है और क्यों इतनी महंगी है.

क्या है Keytruda?
Keytruda का असली नाम पेम्ब्रोलिज़ुमैब (Pembrolizumab) है. इसे अमेरिकी दवा कंपनी Merck & Co. (MSD) बनाती है. इस दवा को पहली बार 2014 में अमेरिका की FDA ने स्किन कैंसर (मेलानोमा) के इलाज के लिए मंजूरी दी थी. आज यह फेफड़ों का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, किडनी कैंसर और कुछ प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर समेत कई गंभीर कैंसर के इलाज में इस्तेमाल हो रही है. यह दवा दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में शामिल है. साल 2025 में इससे कंपनी को करीब 31.7 अरब डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये) की कमाई हुई.

कैसे काम करती है यह दवा?
Keytruda एक इम्यूनोथेरेपी दवा है. इसका मतलब है कि यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करके कैंसर से लड़ने में मदद करती है. हमारे शरीर में टी सेल्स नाम की कोशिकाएं होती हैं, जो बीमारी से लड़ती हैं. लेकिन कैंसर कोशिकाएं PD-1 और PD-L1 नाम के प्रोटीन का इस्तेमाल करके इन टी सेल्स से छिप जाती हैं. Keytruda इन प्रोटीन के बीच कनेक्शन को तोड़ देती है. इससे T-cells को कैंसर कोशिकाएं दिखने लगती हैं और वे उन पर हमला कर पाती हैं. इस दवा को IV (ड्रिप) के जरिए कुछ हफ्तों में दिया जाता है. कई मामलों में इसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है.

कितनी महंगी है यह दवा?
Keytruda की कीमत अलग-अलग देशों में अलग है, लेकिन हर जगह यह काफी महंगी है.
अमेरिका: 100 mg की एक वायल की कीमत 6,000 डॉलर (लगभग 5.5 लाख रुपये) से ज्यादा
भारत: 100 mg वायल की कीमत 1.5 लाख रुपये से ज्यादा
आमतौर पर कैंसर के इलाज में हर 3 हफ्ते में 200 mg की डोज दिया जाता है. यानी भारत में एक महीने का खर्च 3 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है.

अगर मरीज के पास बीमा नहीं है, तो सालभर का इलाज लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों तक पहुंच सकता है. यही वजह है कि यह दवा ज्यादातर लोगों के लिए पहुंच से बाहर है.

कितनी असरदार है Keytruda?
यह दवा कई मरीजों के लिए जीवन बढ़ाने में मददगार साबित हुई है. हालांकि, यह हर मरीज पर समान रूप से असर नहीं करती. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों को इसका बहुत फायदा होता है, जबकि कुछ पर इसका असर कम या नहीं के बराबर होता है.

क्या हैं इसके साइड इफेक्ट?

  • थकान

  • मतली

  • भूख कम लगना

  • सांस लेने में तकलीफ

  • सामान्य से अधिक बार मल त्याग

  • पेट के दाईं तरफ दर्द

  • पेशाब की मात्रा में कमी

  • मुंह, नाक, गले या जननांगों में दर्दनाक घाव

  • लगातार या असामान्य सिरदर्द