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NFHS-6: बच्चों में कुपोषण घटा, गर्भवती महिलाओं तक पहुंचीं ज्यादा स्वास्थ्य सेवाएं, मोटापा और लाइफस्टाइल डिजीज बनी नई चुनौती

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या में कमी आई है. यह आंकड़ा 35.5% से घटकर 29.3% हो गया है.

NFHS-6 NFHS-6
हाइलाइट्स
  • बढ़ता मोटापा चिंता का कारण

  • देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2023-24 (NFHS-6) की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक देश में मातृ स्वास्थ्य, बच्चों के पोषण और टीकाकरण के मोर्चे पर बड़ी प्रगति हुई है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के मामलों में कमी आई है, जबकि अस्पतालों में प्रसव और गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है. हालांकि रिपोर्ट ने मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बताया है.

बच्चों के पोषण में सुधार, कुपोषण के आंकड़े घटे
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या में कमी आई है. यह आंकड़ा 35.5% से घटकर 29.3% हो गया है. वहीं गंभीर वेस्टिंग यानी लंबाई के मुकाबले बेहद कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी 7.7% से घटकर 5.2% रह गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण योजनाओं, आंगनवाड़ी सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है. इससे बच्चों के बेहतर विकास और स्वास्थ्य की उम्मीद बढ़ी है.

टीकाकरण और संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का दायरा 83.8% से बढ़कर 87.1% पहुंच गया है. इसके साथ ही अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव यानी संस्थागत डिलीवरी का प्रतिशत बढ़कर 90.6% हो गया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी.

गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच
NFHS-6 के अनुसार गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है. एंटिनेटल केयर (ANC) कवरेज बढ़कर 95.9% हो गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां मिल रही हैं. इससे एनीमिया जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

स्वास्थ्य बीमा का दायरा तेजी से बढ़ा
सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक देश में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में बड़ा विस्तार हुआ है. 2019-21 में जहां 41% परिवार किसी स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 60.2% हो गया है. सरकार की आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) समेत अन्य योजनाओं के विस्तार को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है. इससे लाखों परिवारों को इलाज के खर्च से आर्थिक सुरक्षा मिली है.

मोटापा और लाइफस्टाइल डिजीज बढ़ने पर चिंता
रिपोर्ट में एक नई चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत अब दोहरी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है. एक तरफ कुछ हिस्सों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर वयस्क आबादी में मोटापा और अधिक वजन के मामले बढ़ रहे हैं.

इसके साथ ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गैर-संचारी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधियां और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आने वाले वर्षों में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना जरूरी होगा.