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पंजाब में गैस्ट्रो और डिहाइड्रेशन के 3279 मरीजों का कैशलेस इलाज, सेहत योजना के तहत 73 लाख रुपए से ज्यादा खर्च

पंजाब में गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है. ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत जनवरी से अप्रैल के बीच 3279 मरीजों का फ्री में इलाज किया गया. ये मरीज गैस्ट्रो और डिहाइड्रेशन से संबंधित बीमारियों से पीड़ित थे. इनपर 73.42 लाख खर्च किए गए.

CM Bhagwant Mann CM Bhagwant Mann

पंजाब भीषण गर्मी और गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन की मार झेल रहा है. ऐसे में 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' हजारों परिवारों के लिए मजबूत सहारा बनकर उभरी है. तेज गर्मी का असर अब केवल खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों के वार्डों तक पहुँच गया है, जहाँ डिहाइड्रेशन और पेट संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं. हालाँकि, बढ़ती बीमारी के बीच पूरे राज्य में कई परिवारों को मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से कैशलेस इलाज से राहत मिल रही है.

4 महीने में 3279 मरीजों का फ्री इलाज-
जनवरी से अप्रैल तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 3,279 गंभीर मामलों में कैशलेस उपचार प्रदान किया गया, जिसमें केवल गैस्ट्रो और पेट संबंधी बीमारियों पर ₹73.42 लाख ख़र्च किए गए.

सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पेट संक्रमण, उल्टी, कमजोरी और गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है. योजना के उपचार रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ही 1,400 से अधिक मरीजों ने डिहाइड्रेशन से जुड़ी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का इलाज करवाया.

इन मामलों में मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज सबसे अधिक रहे, जिनकी संख्या 1,050 से अधिक रही. लगभग 115 मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित थे, जबकि 250 से अधिक मरीजों को बार-बार उल्टी के कारण शरीर में द्रव की कमी और अत्यधिक थकान के चलते अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

पेट संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं- डॉक्टर
गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफ़ेसर एवं प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर के अनुसार अत्यधिक गर्मी पेट संक्रमण के मामलों में वृद्धि कर रही है. उन्होंने कहा कि तेज गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो जाता है और दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि मरीज अक्सर दस्त, पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बुखार जैसी शिकायतें लेकर अस्पताल पहुँचते हैं. गंभीर स्थिति में देरी से इलाज मिलने पर रक्तचाप गिरने, किडनी संबंधी जटिलताओं और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से मानसिक भ्रम जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं.

बुजुर्गों और बच्चों पर ध्यान की जरूरत-
जहाँ बुजुर्गों में इस मौसम में रिकवरी धीमी होती है और जल धारण क्षमता भी कम होती है. वहीं डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चे भी तेजी से डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं. बच्चों में उल्टी और दस्त के कारण तरल पदार्थ तेजी से कम हो जाता है.

सेहत योजना के तहत 1290 बुजुर्गों का इलाज-
आंकड़ों के अनुसार इस गर्मी के स्वास्थ्य संकट का सबसे अधिक प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है. अप्रैल में 1,290 से अधिक बुजुर्गों ने इस योजना के तहत इलाज करवाया, जबकि लगभग 120 बच्चे उपचार प्राप्त कर चुके हैं.

होशियारपुर में अस्पताल पहुंचे सबसे ज्यादा मरीज-
होशियारपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ केवल मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस से पीड़ित 250 से अधिक बुज़ुर्ग मरीजों का इलाज किया गया. जालंधर में भी इसी श्रेणी के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हुए. पटियाला, लुधियाना, रूपनगर, बरनाला, संगरूर, बठिंडा और शहीद भगत सिंह नगर में भी समान प्रवृत्ति देखी गई.

वहीं श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब और गुरदासपुर जिलों में उल्टी और डिहाइड्रेशन के कई मामले सामने आए, जिनमें कई मरीजो को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

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