sit-ups benefits
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठे रहते हैं. लगातार बैठने और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण शरीर धीरे-धीरे कई स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार होने लगता है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, 18 से 64 वर्ष की साल के लोगों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज करनी चाहिए. ऐसे में सिट-अप्स एक आसान और प्रभावी एक्सरसाइज है, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. तो चलिए आपको बताते हैं इसके फायदे.
कोर मसल्स को बनाता है मजबूत
सिट-अप्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इससे न केवल एब्स टोन होते हैं बल्कि पेट की गहरी मांसपेशियां और शरीर के किनारों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं. मजबूत कोर शरीर की कुल ताकत बढ़ाने में मदद करता है और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाता है.
पोश्चर सुधारने में करता है मदद
लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठने से शरीर का पोश्चर खराब हो जाता है. कंधे झुकने लगते हैं और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है. सिट-अप्स करने से पेट और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे शरीर का संतुलन बेहतर रहता है और व्यक्ति सीधा खड़ा हो पाता है. इससे गर्दन और पीठ के दर्द में भी राहत मिल सकती है.
चोट का खतरा होता है कम
कमजोर कोर के कारण अक्सर कमर और पीठ में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. सिट-अप्स रीढ़ की हड्डी और पेल्विस को स्थिरता प्रदान करते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल बनता है और अचानक होने वाले मूवमेंट के दौरान चोट लगने की संभावना कम हो जाती है.
खेल और फिटनेस में करता है मदद
खेल और फिटनेस में करता है मदद
जो लोग दौड़ते हैं, साइकिल चलाते हैं या किसी खेल में हिस्सा लेते हैं, उनके लिए सिट-अप्स काफी फायदेमंद हैं. यह शरीर की ताकत और सहनशक्ति बढ़ाते हैं. इससे लंबे समय तक बिना ज्यादा थके एक्टिव रहा जा सकता है.
शरीर का संतुलन बनाता है बेहतर
सिट-अप्स शरीर की मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करते हैं. इससे शरीर का संतुलन अच्छा रहता है और चलने-फिरने या अन्य शारीरिक गतिविधियों में आसानी होती है.
कैसे करें शुरुआत?
अगर आप पहली बार सिट-अप्स कर रहे हैं, तो सप्ताह में तीन दिन 10 से 15 सिट-अप्स के 3 सेट से शुरुआत करें. धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते हैं. ध्यान रखें कि एक्सरसाइज हमेशा सही तरीके और सही फॉर्म में करें.
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