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Lung Cancer: लंबे समय से स्मोकिंग करने वालों को भी लंग कैंसर का रिस्क कम, स्टडी में हुआ खुलासा

स्मोकिंग नहीं करने वाले अक्सर सोचते हैं कि उन्हें लंग कैंसर जैसी बीमारी नहीं हो सकती. वहीं लंबे समय से धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों का कैंसर कम ही देखने को मिलता है. ऐसा क्यों होता है वैज्ञानिकों ने इसका कारण खोज निकाला है.

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हाइलाइट्स
  • धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर क्यों नहीं होता

  • प्रदूषण भी फेफड़ों के कैंसर की बड़ी वजह

दुनिया में जितनी भी मौतें कैंसर से होती हैं उनमें सबसे अधिक लंग कैंसर ही जिम्मेदार होता है. लोगों को लगता है कि सिगरेट पीने वालों को ही फेफड़ों का कैंसर होता है तो जरा ठहरिए, ऐसा नहीं है. जो लोग जिंदगी भर सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाते, उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो जाता है.

सिगरेट न पीना बेहतर

वैसे तो फेफड़ों के कैंसर से खुद को बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका है, सिगरेट से दूर रहना. धूम्रपान फेफड़े के भीतर एयरवेज को डैमेज कर देता है. लेकिन यह भी सच है कि लंबे समय से धूम्रपान करने वालों में लंग कैंसर यानी फेफड़े का कैंसर कम ही देखने को मिलता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने इसका कारण ढूंढ निकाला है.

स्मोकिंग करने वालों को लंग कैंसर नहीं

नेचर में छपी एक स्टडी के मुताब‍िक स्मोकिंग नहीं करने वाले लोगों में अगर फेफड़ों का कैंसर होता है तो इसके लिए जीन म्यूटेशन जिम्मेदार होता है. इस स्टडी में पाया गया कि स्मोकिंग करने वाले लोगों में कैंसर कोशिकाओं में जो जीन मौजूद होता है, वह जीन स्मोकिंग न करने वाले लोगों की कैंसर कोशिकाओं में नहीं पाया जाता है. कोशिकाओं में गड़बड़ी पैदा होने से कैंसर का खतरा होता है.

नॉन स्मोकर्स को लंग कैंसर कम होने के कारण

अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के एपिडेमियोलॉजिस्ट और पल्मोनोलॉजिस्ट साइमन स्पिवैक के मुताबिक डीएनए की मरम्मत करने वाले जीन कुछ व्यक्तियों में अधिक सक्रिय होते हैं, जो नियमित रूप से सिगरेट पीने पर भी होने वाले कैंसर से रक्षा कर सकते हैं. वहीं नॉन-स्मोकर्स में आम तौर से ईजीएफआर जीन में बदलाव होने से कैंसर होता है. ऐसे लोगों में कुदरती प्रक्रिया के माध्यम से शरीर में जीन का म्यूटेशन (डीएनए में स्थाई परिवर्तन होना) हुआ और इसी कारण कैंसर कोशिकाएं उनके शरीर में पनपती हैं.

देरी से दिखते हैं लक्षण

सिगरेट न पीने के अलावा और भी ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से फेफड़ों का कैंसर होता है. जैसे ऐसे लोगों के संपर्क में रहना जो सिगरेट पीते हैं, वायु प्रदूषण. सिगरेट न पीने वालों में कैंसर के लक्षण देरी से आते हैं.