
माता की चौकी में भावुक हुईं सुधा चंद्रन(Photo: Instagram)
माता की चौकी में भावुक हुईं सुधा चंद्रन(Photo: Instagram)
एक्ट्रेस और मशहूर क्लासिकल डांसर सुधा चंद्रन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में सुधा माता की भक्ति में लीन होकर नाचती दिख रही हैं, सुधा कभी जोर-जोर से हंसती हैं तो कुछ ही पलों में दूसरे को काटने की कोशिश करती दिखती हैं. इस दौरान उनके पति रवि डांग और परिवार के अन्य सदस्य उन्हें संभालते नजर आते हैं.
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को सुधा चंद्रन ने अपने घर पर माता की चौकी रखी थी. इस धार्मिक आयोजन में फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के कई जाने-माने लोग शामिल हुए. चौकी के दौरान सुधा ने भजन गाए और क्लासिकल डांस भी किया. शुरुआत में माहौल पूरी तरह भक्तिमय था, लेकिन कुछ देर बाद सुधा का व्यवहार अचानक बदलता नजर आया. वीडियो में देखा जा सकता है कि वह अजीब हरकतें करने लगती हैं, कभी जोर से हंसती हैं, तो कभी संतुलन खोती दिखती हैं. उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है.
सुधा चंद्रन को आईं माता?
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे आध्यात्मिक शक्ति यानी डिवाइन एनर्जी से जोड़ रहे हैं, तो वहीं कई यूजर्स इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति DID से जोड़कर देख रहे हैं.
इस पूरे मामले को समझने के लिए GNT ने सीनियर साइकोलॉजिस्ट मोनिका शर्मा से बात की, जो पिछले 20 सालों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मोनिका शर्मा बताती हैं कि डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (DID), एक गंभीर मेंटल हेल्थ कंडीशन है. यह डिसोसिएटिव डिसऑर्डर्स की श्रेणी में आती है.
DID में क्या होता है?
व्यक्ति को दो या उससे ज्यादा अलग-अलग व्यक्तित्व (Alters) का अनुभव होता है.
ये व्यक्तित्व समय-समय पर व्यक्ति के व्यवहार और चेतना पर कंट्रोल ले सकते हैं.
हर व्यक्तित्व की अपनी पहचान हो सकती है.नाम, उम्र, लिंग, आवाज, पसंद-नापसंद, बोलने का तरीका तक अलग हो सकता है.
अचानक व्यवहार बदल जाना, बोलचाल और भावनाओं में तेज बदलाव इसका हिस्सा हो सकता है.
DID के आम लक्षण
अचानक व्यक्तित्व बदल जाना
मेमोरी गैप्स (ऐसी चीजें याद न होना जो खुद ने की हों)
अपनी लिखावट या सामान को पहचान न पाना
डीपर्सनलाइजेशन (खुद को अपने शरीर से अलग महसूस करना)
डिरियलाइजेशन (दुनिया असली न लगना)
अंदर से आवाजें या विचार आना जो अपनी तरह न लगें
डिप्रेशन, एंग्जायटी, PTSD, आत्महत्या के विचार

DID क्यों होता है?
मोनिका शर्मा के अनुसार DID को ट्रॉमा मॉडल से समझा जाता है. यह अक्सर बचपन में 5-9 साल की उम्र से पहले हुए गंभीर और बार-बार के आघात का नतीजा होता है, जैसे, शारीरिक शोषण, यौन शोषण, भावनात्मक उपेक्षा या अत्याचार ऐसे हालात में बच्चा खुद को मानसिक रूप से बचाने के लिए दर्द और डर को अलग-अलग हिस्सों में बांट लेता है. यही आगे चलकर अलग-अलग व्यक्तित्व के रूप में उभर सकता है.
क्या DID का इलाज है?
DID का कोई स्थायी इलाज नहीं है. हालांकि, इसे साइकोथेरेपी और साइकियाट्रिक दवाओं की मदद से मैनेज किया जा सकता है, ताकि व्यक्ति सामान्य जीवन जी सके.