Diabetes Symptoms
Diabetes Symptoms
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, भारत में डायबिटीज़ तेजी से उभरता हुआ एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है. नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (NCDs) में यह सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है. वर्तमान में देश के करीब 9 करोड़ वयस्क डायबिटीज़ से प्रभावित हैं और अनुमान है कि 2026 तक यह आंकड़ा 10 करोड़ के पार पहुंच सकता है.
आमतौर पर लोग ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान या धुंधली नजर जैसे लक्षणों को ही डायबिटीज़ से जोड़ते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि त्वचा पर दिखने वाले कुछ बदलाव भी ब्लड शुगर असंतुलन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. हालांकि, ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
पिंडलियों पर उभरते धब्बे
डायबिटिक डर्मोपैथी में पिंडलियों पर छोटे, गोल, भूरे या हल्के लाल रंग के धब्बे दिखाई दे सकते हैं. ये आमतौर पर दर्द या खुजली नहीं करते, लेकिन शरीर की छोटी ब्लड वेसल्स में हुए बदलाव का संकेत हो सकते हैं. रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज़ के कई मरीजों में त्वचा से जुड़े ये बदलाव नसों और रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान से जुड़े पाए गए हैं.
गर्दन और बगल का काला पड़ना
अगर गर्दन, बगल, जांघों या उंगलियों के जोड़ों पर त्वचा मोटी, गहरी और मखमली-सी दिखने लगे, तो यह एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स हो सकता है. यह स्थिति अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है और मोटापा व टाइप-2 डायबिटीज़ का शुरुआती संकेत मानी जाती है.
जख्म जो भरने में लेते हैं वक्त
डायबिटीज़ में अगर छोटी-सी चोट या घाव भी लंबे समय तक ठीक नहीं होता, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. ब्लड सर्कुलेशन की कमी, नसों को नुकसान और इम्यून सिस्टम की कमजोरी इसके पीछे प्रमुख कारण होते हैं. यही वजह है कि डायबिटिक मरीजों में क्रॉनिक घाव और खासकर डायबिटिक फुट अल्सर का खतरा बढ़ जाता है.
बार-बार होने वाले इंफेक्शन
ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. इसका असर यह होता है कि फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन बार-बार होने लगते हैं, खासकर त्वचा की सिलवटों, पैरों और प्राइवेट एरिया में. यह स्थिति अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़ की ओर इशारा कर सकती है.
लगातार खुजली और अत्यधिक रूखापन
हाई ब्लड शुगर शरीर से ज्यादा तरल पदार्थ खींच लेता है, जिससे त्वचा सूखी और खुजलीदार हो जाती है. इसके अलावा, छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचने से पसीने और नेचुरल ऑयल का स्राव भी कम हो जाता है, जिससे स्किन और ज्यादा ड्राई महसूस होती है.