वर्ल्ड किडनी डे
वर्ल्ड किडनी डे
किडनी आपको शरीर का बेहद की महत्वपूर्ण अंग है. अगर किडनी ढंग से फंक्शन न करें, तो आपको कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं. अगर किडनी ढंग से काम न करे तो हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, इंफेक्शन जैसी कई बीमारियां आपको घेर सकती हैं. इन बीमारियों के कारण आपके शरीर में टॉक्सिन बनना बंद हो जाएंगे, और अंततः: आपकी किडनी फेल हो सकती है. इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इस स्थिति के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल दुनिया 9 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाती है. तो चलिए आज आपको इस मौके पर किडनी फंक्शन के खराब होने से कुछ लक्षण और इससे जुड़े हुए कुछ भ्रम को बताते हैं.
किडनी खराब होने के लक्षण
अगर आपकी किडनी खराब हो रही है, तो आपको कुछ लक्षण दिखेंगे जैसे-
पैरों, टखनों, पैरों या चेहरे में सूजन
थकान और कमजोरी
भूख में कमी
मितली और उल्टी
यूरिन के बनने और कलर में बदलाव
सोने में कठिनाई
हाई ब्लड प्रेशर
खुजली
सांस लेने में कठिनाई
हालांकि, कुछ लोगों को तब तक किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं हो सकता है जब तक कि क्षति काफी बढ़ न जाए, यही कारण है कि नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों की मानें तो लाइफस्टाइल में मामूली से कुछ मामूली से बदलाव करके किडनी की फंक्शनिंग को ठीक किया जा सकता है. रोजाना हेल्दी डाइट, धूम्रपान छोड़ के, एक्सरसाइज करके ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है. प्रगतिशील क्रोनिक किडनी रोग या क्षति वाले व्यक्तियों को लंबे समय में किडनी प्रत्यारोपण से लाभ हो सकता है.
किडनी खराब होने के बारे में कुछ सामान्य मिथकों में शामिल हैं:
मिथक: अधिक पानी पीने से गुर्दे की क्षति ठीक हो सकती है.
सच्चाई: हाइड्रेटेड रहना किडनी के कार्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह मौजूदा क्षति को उलट या ठीक नहीं कर सकता है.
मिथक: केवल गुर्दे की बीमारी के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को ही खतरा होता है.
सच्चाई: किसी को भी गुर्दे की क्षति हो सकती है, खासकर अगर उन्हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां हों.
मिथक: किडनी खराब होने पर डायलिसिस ही एकमात्र उपचार विकल्प है.
सच्चाई: जबकि डायलिसिस गुर्दे की विफलता के प्रबंधन के लिए एक विकल्प है, किडनी प्रत्यारोपण और रूढ़िवादी प्रबंधन जैसे अन्य विकल्प हैं जो व्यक्ति की परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त हो सकते हैं.