High Blood Pressure (Photo: Pexels)
High Blood Pressure (Photo: Pexels)
भारत में हर तीन में से एक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में मरीज रोज की दवा समय पर नहीं ले पाते. अब तक रोजाना दवाइयों की गोलियों पर निर्भर रहने वाले हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है. आने वाले समय में संभव है कि साल में सिर्फ दो इंजेक्शन लगवाकर भी बीपी को कंट्रोल में रखा जा सके.
मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक नई समीक्षा के मुताबिक, लंबे समय तक असर करने वाली नई इंजेक्टेबल थैरेपी पर चल रहे ट्रायल उम्मीद जगा रहे हैं कि हाइपरटेंशन के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
कैसे काम करेगी नई थैरेपी?
रिपोर्ट के अनुसार, नई दवाएं सिर्फ ब्लड प्रेशर के आंकड़े कम नहीं करतीं, बल्कि बीमारी की जड़ पर असर डालती हैं. सबसे आगे चल रही दवा Zilebesiran है, जिसे Roche और Alnylam Pharmaceuticals बना रहे हैं. यह siRNA तकनीक के जरिए लिवर में बनने वाले एंजियोटेंसिनोजन प्रोटीन को कम करती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में अहम है. एक इंजेक्शन से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर छह महीने तक कम रह सकता है.
दूसरी दवा Ziltivekimab है, जिसे Novo Nordisk बना रही है. ये सूजन से जुड़े रास्तों को टारगेट करती है, जो हृदय रोग के जोखिम से जुड़े हैं.
क्या यह सुरक्षित और सस्ती होगी?
शुरुआती ट्रायल में इसे लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपरटेंशन आजीवन बीमारी है. इसलिए लंबे समय तक असर और संभावित साइड इफेक्ट पर और रिसर्च की जरूरत है.
दुनिया में 1.4 अरब लोग हाइपरटेंशन से जूझ रहे
World Health Organization के अनुसार, दुनिया में 1.4 अरब लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं और बड़ी संख्या में मरीजों का ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं है. भारत में भी करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं. ऐसे में लंबी अवधि तक असर करने वाले इंजेक्शन दवा लेने में लापरवाही की समस्या को कम कर सकते हैं.