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क्या है Fasting mimicing diet, जो उम्र लंबी करने के साथ-साथ कम कर देगी बीमारियों की संभावना

फास्टिंग का मतलब लोग समझते हैं कि खाना-पीना छोड़ना. लेकिन ऐसा नहीं है फास्टिंग भी कई तरह की होती है. जवान बने रहने के लिए लोग फास्टिंग का तरीका अपनाते हैं जिसे इंटरमिटेंट फास्टिंग बोलते हैं.

Fasting-mimicking diet Fasting-mimicking diet

अपने शरीर को लंबे समय तक 'जवान' रखने के लिए और स्वस्थ जीवन जीने के लिए कई लोग फास्टिंग का सहारा लेते हैं. फास्टिंग कई लोगों के लिए प्रभावशाली साबित भी हुई है लेकिन लंबे समय तक भूखा रहना कुछ लोगों पर भारी पड़ जाता है. सोचिए अगर आपको ऐसी डाइट तैयार करके दी जाए जिसमें आपको लंबे समय तक भूखा भी न रहना पड़े और वह फास्टिंग जितनी प्रभावशाली भी हो?
 
नेचर कम्यूनिकेशन्स नामक जर्नल में प्रकाशित एक नई रीसर्च में खुलासा हुआ है कि फास्टिंग जैसी एक डाइट अपनाने से व्यक्ति में बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है और उसका शरीर भी लंबे समय तक जवान रहता है. फास्टिंग-मिमिकिंग डाइट (FMD) के नाम से मशहूर इस डाइट में व्यक्ति पांच दिनों तक प्लांट बेस्ड सूप,एनर्जी बार,क्रिस्प,चाय,विटामीन और मिनरल सप्लिमेंट्स पर निर्भर रहता है.इस डाइट में अनसैचुरेटिड फैट की मात्रा ज्यादा लेकिन कैलरी,प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है.
 
144 लोगों पर किया गया शोध
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया (यूएससी), येल स्कूल ऑफ मेडिसिन और इटली के एआईआरसी इंस्टिट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर ऑन्कोलोजी के शोधकर्ताओं ने कुल 144 लोगों पर दो क्लीनिकल शोध किए. इस शोध में उन्होंने पाया कि एफएमडी डाइट पर रहने वाले लोगों में डाइबिटीज़ होने की संभावनाएं और लिवर फैट कम हुआ है. इसके अलावा उन लोगों का इम्यून सिस्टम भी बेहतर काम कर रहा थी, जिससे व्यक्ति की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ी थी और 'बायोलॉजिकल उम्र' कम हुई थी.

रिसर्च में क्या पाया गया?
यूएससी के गेरोंटोलोजिस्ट (वृद्धावस्था की पढ़ाई करने वाला डॉक्टर) वॉल्टर लॉन्गो बताते हैं किसी रिसर्च ने पहली बार दो अलग-अलग क्लीनिकल शोध कर 'बायोलॉजिकल उम्र' घटने और इम्यून सिस्टम बेहतर होने के सबूत पेश किए हैं. एक व्यक्ति की बायोलॉजिकल उम्र उसकी सेल्स के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है.इस शोध में जिन लोगों को डाइट पर रखा गया,उनकी 'बायोलॉजिकल उम्र' अन्य लोगों की तुलना में 2.5 साल कम पाई गई.यानी उनकी सेल्स अन्य लोगों की तुलना में 2.5 साल 'अधिक जवान' थीं.

इन मामलों में देखा गया सुधार
इस शोध में यह भी पाया गया कि जहां इस डाइट से व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होता है, वहीं उनके वजन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता.गौरतलब है कि एफएमडी से स्वास्थ्य को होने वाले लाभ पहली बार सामने नहीं आए हैं.इससे पहले एफएमडी से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) में भी सुधार देखे गए हैं. हालांकि उस वक्त यह शोध चूहों पर की गई थी,ना कि इंसानों पर.

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अब शोधकर्ता यह देखना चाहते हैं कि एफएमडी को बड़े पैमाने पर बतौर लाइफस्टाइल अपनाया जाता है या नहीं? डॉ लॉन्गो का कहना है कि इस रिसर्च में सामने आई बातों के बाद कई हेल्थकेयर पेशेवरों को अपने मरीजों को एफएमडी अपनाने का मशवरा देना चाहिए. खासकर उन मरीजों को जिनमें बीमारियों का जोखिम ज़्यादा है.