मलेरिया वैक्सीन
मलेरिया वैक्सीन
दुनियाभर में बढ़ते मलेरिया के मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक और वैक्सीन को मंजूरी दे दी है. WHO ने R21/मैट्रिक्स-एम वैक्सीन (R21/Matrix-M vaccine) की सिफारिश की है. R21/मैट्रिक्स-एम वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई है. ये मलेरिया की ऐसी दूसरी वैक्सीन है जिसकी सिफारिश WHO ने की है. ये कितनी प्रभावी है ये इस बात से पता लगाया जा सकता है कि WHO के 75% एफीकेसी टारगेट को इसने पूरा किया है. और इस टारगेट को पूरा करना वाली ये मलेरिया की पहली वैक्सीन है. इस वैक्सीन की डोज भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार होने वाली हैं.
मलेरिया से हर साल होती हैं कई मौतें
दरअसल, मलेरिया मच्छर से होने वाली बीमारी है. इस बीमारी की वजह से हर साल करीब पांच लाख लोगों की जान चली जाती है. इसमें ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाएं प्रभावित होती हैं. R21/Matrix-M वैक्सीन को लेकर डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने कहा, “एक मलेरिया शोधकर्ता के रूप में, मैं उस दिन का सपना देखता था जब हमारे पास मलेरिया के खिलाफ एक सुरक्षित और प्रभावी टीका होगा. अब हमारे पास दो हैं, ”
हर साल बढ़ रही है वैक्सीन की मांग
पिछले कुछ सालों में वैक्सीन की मांग बहुत बड़ी है. हालांकि, 2021 में WHO ने जिस वैक्सीन को लॉन्च किया था वो पहली मलेरिया वैक्सीन थी. WHO के डॉ. टेड्रोस एडनोम कहते हैं, "डब्ल्यूएचओ ने जिस वैक्सीन को लेकर बात की है वह मलेरिया का दूसरा टीका है. ये बच्चों की तेजी से रक्षा करेगा और हमें मलेरिया मुक्त भविष्य के हमारे दृष्टिकोण के करीब लाएगा."
भारत में होगी तैयार
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, डोज के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता - सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया - पहले से ही एक साल में 10 करोड़ से ज्यादा डोज बनाने के लिए तैयार है और इसे 20 करोड़ तक बढ़ाने की योजना है. प्रत्येक खुराक की कीमत $2 और $4 के बीच है; प्रति व्यक्ति चार खुराक की जरूरत है. यह RTS-S (मलेरिया की पहली वैक्सीन) की लगभग आधी कीमत है. अब तक, RTS-S की केवल 18 मिलियन डोज हैं.
ज्यादा लोगों को बचाया जा सकेगा
अफ्रीका के लिए डब्ल्यूएचओ के रीजनल डायरेक्टर डॉ मत्शिदिसो मोइती ने कहा, “यह दूसरा टीका भारी मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने की क्षमता रखता है. दोनों टीके मलेरिया की रोकथाम और उसे कंट्रोल करने में मदद करेंगे. इसके साथ इस घातक बीमारी से अफ्रीका में सैकड़ों हजारों युवाओं की जान बचाई जा सकती है.”
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