
common cold vs allergies
common cold vs allergies
मौसम बदल रहा है. दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड के बीच लोग इंफेक्शन से परेशान हैं, किसी की नाक बह रही है तो कुछ लोगों को गले में खराश और खांसी परेशान कर रही है. घर-घर में सर्दी, जुकाम और वायरल फीवर के मरीज हैं. ऐसेमें सवाल उठता है क्या ठंड का मौसम सीधे तौर पर हमें बीमार करता है? लेकिन क्या तापमान बदलने से सचमुच सर्दी-जुकाम हो जाता है? और क्या बार-बार जुकाम होना कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है?
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, फरीदाबाद (सेक्टर 88) के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. जयंत ठाकुरिया से. आइए, डॉक्टर से जानते हैं सर्दी-जुकाम और वायरल से जुड़े 5 बड़े सवालों के जवाब, जो हर किसी के लिए जानना बेहद जरूरी हैं.
मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम के मामले क्यों बढ़ जाते हैं?
मौसम में बदलाव के दौरान तापमान और हवा में नमी का स्तर बदलता है. इसका असर सांस से जुड़ी नली पर पड़ सकता है. साथ ही, कुछ परिस्थितियों में सांस से जुड़े वायरस के फैलने की संभावना बढ़ जाती है. लोग बंद जगहों पर ज्यादा समय बिताते हैं, जहां संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है.
डॉ. के मुताबिक, अचानक बदलता मौसम सांस की नली को संवेदनशील बना सकता है. इससे धूल, धुएं और दूसरे बाहरी कारकों से परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सर्दी-जुकाम सीधे ठंड लगने से नहीं, बल्कि वायरस के संक्रमण से होता है. बचाव के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं, पर्याप्त पानी पिएं, संतुलित भोजन करें और पूरी नींद लें. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें. बीमार लोगों के बहुत नजदीक रहने से बचें.
सामान्य सर्दी और मौसमी एलर्जी में क्या अंतर है? कैसे पहचानें?
अक्सर लोगों को यह भ्रम रहता है कि उन्हें सर्दी हुई है या किसी चीज़ से एलर्जी हो गई है, क्योंकि दोनों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं. सामान्य सर्दी (Common Cold) और मौसमी एलर्जी दोनों में ही छींके आना, नाक बहना और नाक बंद होना आम बात है. लेकिन साधारण सर्दी होने पर गले में खराश, शरीर में हल्का दर्द, खांसी और कभी-कभार हल्का बुखार भी आ जाता है, जो आमतौर पर 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है.
वहीं दूसरी तरफ, मौसमी एलर्जी में आंखों में खुजली, नाक में खुजली और लगातार छींके आने की समस्या होती है, लेकिन इसमें बुखार नहीं आता और यह हफ्तों तक बनी रह सकती है. एलर्जी आमतौर पर परागकण, धूल या अन्य एलर्जेन के कारण होती है, जबकि सर्दी किसी वायरस के संक्रमण से होती है.

क्या सर्दी-जुकाम होने पर नहाना या बाल धोना चाहिए?
सर्दी-जुकाम होने पर नहाना या बाल धोना आमतौर पर सुरक्षित है. नहाने से वायरस का संक्रमण नहीं बढ़ता. गुनगुने पानी से नहाने पर कुछ समय के लिए नाक बंद होने की परेशानी कम हो सकती है और बलगम ढीला पड़ सकता है. हालांकि, बहुत ठंडे पानी से न नहाएं, लंबे समय तक ठंडे वातावरण में न रहें और नहाने के बाद शरीर व बाल अच्छी तरह सुखा लें. अगर तेज बुखार है तो नहाने से बचें.
क्या सामान्य सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?
नहीं, सामान्य सर्दी-जुकाम में अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए. इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मामलों में सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है, जबकि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होती है. बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से दस्त, एलर्जी और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं.सामान्य सर्दी-जुकाम में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और लक्षणों के अनुसार इलाज से राहत मिल सकती है. नाक बंद होने पर सलाइन नेजल स्प्रे जैसे उपाय मदद कर सकते हैं.
कुछ लोगों को बार-बार सर्दी क्यों होती है?
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें साल में कई बार सर्दी-जुकाम हो जाता है, जिससे वे यह सोचने लगते हैं कि शायद उनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो चुकी है. इस भ्रम को दूर करते हुए डॉ. जयंत ठाकुरिया बताते हैं कि बार-बार सर्दी होना हमेशा कमजोर इम्यूनिटी का संकेत नहीं होता. एक सामान्य वयस्क को साल में 2 से 3 बार सर्दी-जुकाम होना आम बात है, जबकि बच्चों में यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है. बार-बार इन्फेक्शन होने की असली वजहें आसपास के बीमार लोगों के संपर्क में आना, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर रहना, ठीक से नींद न लेना, तनाव, स्मोकिंग या खानपान में पोषण की कमी हो सकती है. कई बार एलर्जी की वजह से भी बिना किसी इन्फेक्शन के सर्दी जैसे लक्षण बने रहते हैं.
सर्दी-जुकाम से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथ धोएं.
संतुलित भोजन करें और रोजाना पर्याप्त पानी पिएं.
रात में पर्याप्त नींद लें और नियमित शारीरिक गतिविधि करें.
खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें.
धूल, धुएं और प्रदूषण के संपर्क को कम करने की कोशिश करें.
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें.
तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लगातार बिगड़ते लक्षणों को नजरअंदाज न करें.
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