scorecardresearch

बारिश शुरू होते ही क्यों बढ़ जाती है भुट्टे की डिमांड? क्या है इसके पीछे का साइंस

बारिश के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान शरीर को ऐसे फूड की जरूरत होती है, जिसमें ऊर्जा देने के साथ जरूरी पोषक तत्व भी हो. भुट्टा इसमें मददगार माना जाता है.

Corn Corn

पहली बारिश की बूंदें गिरते ही सड़क किनारे भुट्टे बिकने लगते हैं. हर साल बारिश शुरू होते ही भुट्टे की बिक्री अचानक बढ़ जाती है. यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे खेती का सीजन, मौसम, शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें और हमारी क्रेविंग होती है. यही वजह है कि मानसून आते ही भुट्टा लोगों की पहली पसंद बन जाता है.

बारिश के साथ ही क्यों बाजार में बढ़ जाती है भुट्टे की मौजूदगी?
भारत में भुट्टे की खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में होती है. किसान जून-जुलाई में मानसून की पहली बारिश के साथ इसकी बुवाई करते हैं. कई इलाकों में जल्दी पकने वाली किस्में अगस्त से बाजार में आने लगती हैं. वहीं कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून फसल भी इसी समय उपलब्ध रहती है. यानी जिस वक्त बारिश शुरू होती है, उसी समय बाजार में ताजा और मुलायम भुट्टे मार्केट में आने लगते हैं. सप्लाई बढ़ने से सड़क किनारे ठेलों से लेकर मंडियों तक हर जगह भुट्टा आसानी से मिलने लगता है. यही आसान उपलब्धता इसकी डिमांड को और बढ़ा देती है. बारिश के दौरान तापमान कम हो जाता है और हवा में नमी बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में लोग गर्म और ताजा चीजें खाना ज्यादा पसंद करते हैं. अंगारों पर भुना हुआ गर्मागर्म भुट्टा न सिर्फ शरीर को गर्माहट देता है, बल्कि उसकी स्मोकी खुशबू भी भूख को बढ़ाती है. नींबू, नमक और मसाले के साथ इसका स्वाद मानसून के अनुभव को और खास बना देता है.

बारिश में क्यों बढ़ती है भुट्टा खाने की क्रेविंग?
बारिश कई लोगों के लिए बचपन की यादें, छुट्टियां और परिवार के साथ बिताए पल ताजा कर देती है. इसे नॉस्टैल्जिया इफेक्ट कहा जाता है. जब कोई मौसम किसी खास खाने से जुड़ जाता है, तो दिमाग उसी मौसम में उस भोजन की इच्छा पैदा करने लगता है. यही वजह है कि बारिश शुरू होते ही लोगों को चाय-पकोड़ों के साथ भुट्टे की भी याद आने लगती है. इसे सीजनल फूड एसोसिएशन भी कहा जाता है. जैसे सर्दियों में गाजर का हलवा और गर्मियों में आम याद आते हैं, वैसे ही मानसून का सबसे मजबूत फूड कनेक्शन भुट्टे से बन चुका है.

शरीर की जरूरतें भी बढ़ाती हैं भुट्टे की अहमियत
बारिश के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान शरीर को ऐसे फूड की जरूरत होती है, जिसमें ऊर्जा देने के साथ जरूरी पोषक तत्व भी हो. भुट्टा इसमें मददगार माना जाता है क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं. भुना हुआ भुट्टा कम तेल में तैयार होता है, इसलिए तले हुए स्नैक्स की तुलना में यह अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है.

भुट्टे में क्या मिलता है?
भरपूर फाइबर, जो पाचन को बेहतर बनाता है.
कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, जो लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं.
विटामिन बी समूह, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी हैं.
मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल.
ल्यूटिन और जियाजैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट, जो आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.

बारिश में भुट्टा खाना ज्यादा सुरक्षित क्यों माना जाता है?
मानसून में पानी से फैलने वाले संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में खुला और कच्चा भोजन खाने से बचने की सलाह दी जाती है. भुट्टा सीधे अंगारों पर अच्छी तरह पकाया जाता है. तेज गर्मी अधिकांश सूक्ष्मजीवों के खतरे को कम कर देती है. इसलिए सड़क किनारे मिलने वाले कई अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में ताजा भुना हुआ भुट्टा अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है. भुट्टा अधिकांश लोगों के लिए एक अच्छा स्नैक हो सकता है. हालांकि जिन लोगों को डायबिटीज है या जिन्हें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नियंत्रित रखनी होती है, उन्हें अपनी डाइट के अनुसार इसकी मात्रा तय करनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: