
World Brain Day 2026
World Brain Day 2026
सुबह ऑफिस जाने की जल्दी में आप चाबी ढूंढ रहे हैं. पूरा घर छान मारते हैं, लेकिन चाबी नहीं मिलती. कुछ देर बाद खुद ही सामने टेबल पड़ी चाबी दिख जाती है. कभी किचन में किसी काम से जाते हैं और वहां पहुंचकर भूल जाते हैं कि आखिर आए किसलिए थे? किसी जान-पहचान वाले का नाम अचानक याद नहीं आता या बातचीत के बीच में ही यह भूल जाते हैं कि क्या कहना था? अगर ऐसा कभी-कभार हो तो चिंता की बात नहीं, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
आज वर्ल्ड ब्रेन डे के मौके पर GNT ने मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम के एसोसिएट डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. हिमांशु चंपानेरी से बातचीत की. उन्होंने बताया कि कई लोग इन लक्षणों को उम्र, तनाव या थकान का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार यह ब्रेन फॉग का संकेत हो सकता है.
क्या होता है ब्रेन फॉग?
डॉ. हिमांशु चंपानेरी बताते हैं कि ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिमाग पहले की तरह तेजी से काम नहीं कर पाता. व्यक्ति को सोचने, ध्यान लगाने, चीजें याद रखने और सही शब्द खोजने में परेशानी होने लगती है. आसान शब्दों में कहें तो ऐसा लगता है जैसे दिमाग पर धुंध छा गई हो और सोचने-समझने की क्षमता कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई हो.
ब्रेन फॉग के ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं
बार-बार चीजें भूल जाना
सामने रखी वस्तु भी तुरंत नजर न आना
किसी का नाम याद करने में दिक्कत होना
बातचीत के बीच में यह भूल जाना कि क्या कहना था
किसी काम के लिए जाकर बीच में ही उद्देश्य भूल जाना
ध्यान केंद्रित न कर पाना
जल्दी मानसिक थकान महसूस होना
सोचने की गति धीमी पड़ जाना
काम की उत्पादकता कम हो जाना

अगर ये समस्याएं कभी-कभार हों तो यह सामान्य हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
ब्रेन फॉग और माइंड ब्लैंक में क्या अंतर है?
ब्रेन फॉग ऐसा है जैसे दिमाग पर धुंध छा गई हो. आप काम तो कर रहे हैं, लेकिन सोचने और याद रखने में लगातार मुश्किल हो रही है. माइंड ब्लैंक ऐसा है जैसे अचानक दिमाग की स्क्रीन कुछ पल के लिए खाली हो जाए, जो बात आपको पता थी, वह कुछ सेकेंड के लिए याद न आए, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर याद आ जाए. दरअसल माइंड ब्लैंक अचानक होने वाली स्थिति है, जिसमें कुछ सेकंड या मिनट के लिए दिमाग पूरी तरह खाली-सा महसूस होने लगता है, उस समय व्यक्ति को पता होने के बावजूद कुछ याद नहीं आता.
कब भूलना सामान्य है और कब बन जाती है चिंता की बात?
डॉ. चंपानेरी कहते हैं कि तनाव, नींद की कमी या एक साथ कई काम करने के कारण कभी-कभी किसी का नाम भूल जाना या चीजें इधर-उधर रख देना सामान्य बात है. लेकिन अगर ये समस्याएं हफ्तों या महीनों तक बनी रहें, लगातार बढ़ती जाएं या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत
व्यवहार या स्वभाव में अचानक बदलाव
बार-बार तेज सिरदर्द
दौरे (सीजर) पड़ना
हाथ या पैर में कमजोरी
धुंधला दिखना या नजर में बदलाव
बोलने में परेशानी
चलने या संतुलन बनाने में दिक्कत
दिमाग को तेज रखने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
हर रात 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें.
रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें.
फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट वाला संतुलित भोजन खाएं.
किताब पढ़ें, नई चीजें सीखें, पहेलियां हल करें और लोगों से बातचीत करें.
योग, मेडिटेशन या गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों से तनाव कम करें.
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं.
ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें.
धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन सीमित करें.
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन B12 जैसी पोषक तत्वों की कमी का इलाज कराएं.
दिमाग की सेहत के लिए डॉक्टर की सबसे अहम सलाह
डॉ. हिमांशु चंपानेरी कहते हैं कि लोग अक्सर लंबे समय तक बनी रहने वाली भूलने की आदत या ध्यान की कमी को सिर्फ तनाव या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं. जबकि कई बार इसके पीछे थायरॉयड की समस्या, विटामिन की कमी, नींद से जुड़ी बीमारी, एंग्जायटी या अन्य न्यूरोलॉजिकल कारण हो सकते हैं. उनका कहना है कि अगर याददाश्त या सोचने-समझने में बदलाव लगातार महसूस हो और इसका असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर समस्याओं को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है.