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World Hearing Day: रोज की 6 आदतें जो चुपचाप खराब कर रही हैं आपकी सुनने की क्षमता, डॉक्टर से जानिए बचाव के तरीके

World Hearing Day: पहले हियरिंग लॉस उम्र से जुड़ी समस्या मानी जाती थी, लेकिन अब 20-30 साल के युवा भी टिनिटस (कानों में घंटी बजना), बातचीत समझने में दिक्कत और तेज आवाज से परेशानी की शिकायत लेकर आ रहे हैं. इसका वजह लाइफस्टाइल है, खासकर इयरफोन और हेडफोन का ज्यादा इस्तेमाल.

World Hearing Day World Hearing Day
हाइलाइट्स
  • रोजमर्रा की आदतें खराब कर रही हैं सुनने की क्षमता?

  • 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है

3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य हियरिंग हेल्थ के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बहरेपन को रोकने के उपायों को प्रोत्साहित करना है. इस मौके पर हमने Max Super Speciality Hospital के सीनियर डायरेक्टर-ईएनटी Dr. Anurag Jain उन्होंने बताया कि आजकल युवाओं में सुनने की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसकी बड़ी वजह हमारी रोजमर्रा की आदतें हैं.

आइए समझते हैं कि आपकी किन आदतों की वजह से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और आप कैसे बचाव कर सकते हैं.

सवाल: क्या सुनने की समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही?
बिल्कुल नहीं. पहले हियरिंग लॉस उम्र से जुड़ी समस्या मानी जाती थी, लेकिन अब 20-30 साल के युवा भी टिनिटस (कानों में घंटी बजना), बातचीत समझने में दिक्कत और तेज आवाज से परेशानी की शिकायत लेकर आ रहे हैं. इसका वजह लाइफस्टाइल है, खासकर इयरफोन और हेडफोन का ज्यादा इस्तेमाल.

सवाल: इयरफोन का इस्तेमाल कितना खतरनाक है?
सबसे बड़ा खतरा है हाई वॉल्यूम पर म्यूजिक सुनना. अगर आपके पास खड़ा व्यक्ति आपकी प्लेलिस्ट सुन पा रहा है, तो समझिए आवाज बहुत तेज है. लगातार तेज आवाज से कान के अंदर मौजूद नाजुक हेयर सेल्स डैमेज हो जाते हैं. ये सेल्स दोबारा नहीं बनते, इसलिए नुकसान स्थायी हो सकता है. अधिकतम 60% वॉल्यूम पर और लगातार 60 मिनट से ज्यादा नहीं ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

Hearing Loss


सवाल: क्या लंबे समय तक हेडफोन लगाकर वेब सीरीज या गेम खेलना भी नुकसानदायक है?
हां, भले ही आवाज मध्यम हो, लेकिन लंबे समय तक लगातार साउंड एक्सपोजर भी नुकसान पहुंचाता है. आजकल लोग 3-4 घंटे तक बिंज-वॉचिंग करते हैं या गेम खेलते हैं. यह आदत धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है. हर एक घंटे में कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें.

सवाल: कौन-से शुरुआती संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
कानों में लगातार घंटी बजना (टिनिटस)
भीड़ में बातचीत समझने में दिक्कत
आवाज का दबा-दबा सुनाई देना
तेज आवाज से चिढ़
अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं. लेकिन अगर ये बार-बार हो रहे हैं, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

सवाल: लोग अक्सर कॉटन बड से कान साफ करते हैं. क्या यह सही है?
बिल्कुल नहीं. कॉटन बड कान साफ नहीं करता, बल्कि वैक्स को अंदर की ओर धकेल देता है. इससे ईयर कैनाल ब्लॉक हो सकता है या ईयरड्रम को चोट लग सकती है. कान खुद-ब-खुद साफ होने वाला अंग है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से प्रोफेशनल क्लीनिंग कराएं.

World Hearing Day

सवाल: ट्रैफिक, कंस्ट्रक्शन साइट या शादियों जैसी तेज आवाजों से कितना खतरा है?
लगातार तेज शोर में रहना बेहद नुकसानदायक है. ट्रैफिक, जिम, कंसर्ट या पटाखों की आवाज अंदरूनी कान की कोशिकाओं को धीरे-धीरे खत्म कर सकती है. अगर आपको ऐसे माहौल में रहना पड़ता है, तो ईयरप्लग या नॉइज-कैंसिलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करें.

सवाल: बच्चों में कान के संक्रमण को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक है?
बच्चों में बार-बार होने वाला ईयर इंफेक्शन अगर समय पर ठीक न हो, तो स्थायी हियरिंग लॉस का कारण बन सकता है. माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा टीवी की आवाज ज्यादा तो नहीं बढ़ा रहा.

जानें सेफ लिसनिंग गाइडलाइंस
60-60 रूल अपनाएं.
नॉइज-कैंसिलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करें ताकि वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत न पड़े.
हर घंटे 5-10 मिनट का ब्रेक लें.
तेज शोर वाली जगहों पर ईयर प्रोटेक्शन पहनें.
कान में कभी भी नुकीली या तेज वस्तु न डालें.

इयरबड्स का सेफ इस्तेमाल कैसे करें?
इन-ईयर डिवाइस की बजाय ओवर-द-ईयर हेडफोन बेहतर विकल्प हो सकते हैं.
वॉल्यूम लिमिट फीचर ऑन रखें.
सोते समय इयरफोन लगाकर म्यूजिक न सुनें.
बच्चों को इयरबड्स देने से पहले वॉल्यूम कंट्रोल सेट करें.

सवाल: अगर किसी को लगातार दिक्कत हो रही है तो क्या करना चाहिए?
अगर दो हफ्ते से ज्यादा समय तक लक्षण बने रहें, तो ऑडियोमेट्री टेस्ट कराना चाहिए. शुरुआती स्टेज में पहचान हो जाए तो नुकसान को रोका जा सकता है.