World Ovarian Cancer Day
World Ovarian Cancer Day
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान देना पीछे छूट जाता है. खासकर पेट दर्द, गैस, ब्लोटिंग या पीरियड्स में बदलाव जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन कई बार यही छोटे दिखने वाले लक्षण ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं. ओवेरियन कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे (World Ovarian Cancer Day) मनाया जाता है.
ओवेरियन कैंसर को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं और बीमारी अक्सर एडवांस स्टेज में पकड़ में आती है. यही कारण है कि हर साल मनाया जाने वाला ओवेरियन कैंसर डे महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है. इस कड़ी में ओवेरियन कैंसर से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए GNT ने Max Super Speciality Hospital, Patparganj की Chairman- Medical Oncology डॉ. मीनू वालिया से बात की. डॉ. मीनू वालिया ने ओवेरियन कैंसर विस्तार से जानकारी दी है.
ओवरी से जुड़ी कौन-कौन सी बीमारियां हैं आम
महिलाओं में ओवरी से जुड़ी कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं. इनमें सबसे सामान्य समस्या ओवेरियन सिस्ट है. इसमें ओवरी में पानी या तरल पदार्थ से भरी गांठ बन जाती है. ज्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होती, लेकिन कई बार दर्द, पीरियड्स में गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकती है. इसके अलावा आजकल पीसीओएस यानी Polycystic Ovary Syndrome तेजी से बढ़ रहा है. यह हार्मोनल समस्या है, जिसमें वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर बाल आना और प्रेगनेंसी में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एंडोमेट्रियोसिस और ओवरी में संक्रमण जैसी बीमारियां भी महिलाओं की सेहत को प्रभावित करती हैं. वहीं सबसे गंभीर बीमारी ओवेरियन कैंसर है, जिसकी पहचान अक्सर देर से हो पाती है.
ओवेरियन कैंसर को Silent Killer भी कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य गैस, पेट फूलना या कमजोरी जैसे लगते हैं, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है. महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और नियमित स्त्री रोग जांच करवानी चाहिए.
ओवेरियन कैंसर के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉ. मीनू वालिया के अनुसार, ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं. यही कारण है कि महिलाएं इन्हें अक्सर साधारण परेशानी मान लेती हैं. लेकिन अगर कुछ लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए.
ओवेरियन कैंसर के प्रमुख संकेत हैं...
लगातार पेट फूलना या भारीपन महसूस होना
पेट या पेल्विक एरिया में दर्द
थोड़ी मात्रा खाने पर भी जल्दी पेट भर जाना
बार-बार पेशाब आना
अचानक वजन कम होना
लगातार थकान
पीरियड्स में बदलाव या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये लक्षण 2 से 3 सप्ताह तक लगातार बने रहें, तो महिलाओं को बिना देरी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर जांच होने से बीमारी का इलाज आसान हो सकता है.
किन महिलाओं में ज्यादा होता है खतरा
कुछ महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा सामान्य से अधिक देखा जाता है. जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी को ओवरी, ब्रेस्ट या कोलन कैंसर हो चुका हो, उनमें जोखिम बढ़ जाता है. इसके अलावा BRCA1 और BRCA2 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन भी इस बीमारी का बड़ा कारण माने जाते हैं. 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, जिन महिलाओं को कभी गर्भधारण नहीं हुआ और एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाएं भी हाई रिस्क कैटेगरी में आती हैं. मोटापा, धूम्रपान और अस्वस्थ जीवनशैली भी खतरे को बढ़ा सकती है. हालांकि, अब डॉक्टर कम उम्र की महिलाओं में भी इसके बढ़ते मामलों को लेकर चिंतित हैं. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, हार्मोनल बदलाव और पर्यावरणीय कारणों को इसकी एक बड़ी वजह माना जा रहा है.
क्या लाइफस्टाइल में बदलाव कैंसर के इलाज में मदद कर सकते हैं?
डॉ. मीनू वालिया बताती हैं कि स्वस्थ जीवनशैली कैंसर के इलाज और रिकवरी दोनों में मददगार साबित होती है. हालांकि केवल लाइफस्टाइल बदलाव कैंसर का इलाज नहीं हैं, लेकिन ये शरीर को मजबूत बनाने और इलाज को बेहतर तरीके से सहने में मदद करते हैं. संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करता है. इसके साथ ही धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है. वजन को नियंत्रित रखना महिलाओं की ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है. डॉक्टर का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य. परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और भावनात्मक समर्थन मरीज की रिकवरी में बड़ा योगदान देते हैं.
युवा महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
भारत में युवा महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है. इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं. जंक फूड का बढ़ता चलन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, मोटापा और बढ़ता तनाव हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं. इसके अलावा देर से शादी या गर्भधारण, पर्यावरण प्रदूषण और केमिकल एक्सपोजर भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. कुछ मामलों में पीसीओएस और एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं भी ओवेरियन कैंसर की संभावना बढ़ सकती हैं.
डॉ. मीनू वालिया का मानना है कि जागरूकता की कमी भी बड़ी समस्या है. युवा महिलाएं पेट दर्द, ब्लोटिंग या अनियमित पीरियड्स को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करती रहती हैं. यही लापरवाही बाद में गंभीर स्थिति का रूप ले सकती है.
हिलाओं को अपनी सेहत को देनी होगी प्राथमिकता
डॉ. मीनू वालिया का कहना है कि महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए. भारत में अक्सर महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं. लेकिन समय पर जांच और जागरूकता से ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज संभव है.
World Ovarian Cancer Day का उद्देश्य भी यही है कि महिलाएं अपनी सेहत के प्रति सजग बनें, शुरुआती संकेतों को समझें और बिना झिझक डॉक्टर से सलाह लें. क्योंकि सही समय पर उठाया गया एक कदम जिंदगी बचा सकता है.
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