
World Stroke Day
World Stroke Day
किसी से बात करते हुए अचानक उसकी जुबान लड़खड़ाने लगे, चेहरे का एक हिस्सा लटक जाए या हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज न करें. ये स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है. यह स्थिति अचानक पैदा हो सकती है. समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है या व्यक्ति को जिंदगीभर के लिए दिव्यांग बना सकता है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ता कोलेस्ट्रॉल और स्मोकिंग जैसी आदतें इसका खतरा बढ़ाती हैं.
आज वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर GNT ने मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. विपुल गुप्ता से बात की. उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचानें, ब्रेन की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली कौन-सी आदतों से बचें और स्ट्रोक आने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें.
स्ट्रोक के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉ. विपुल गुप्ता के मुताबिक स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं. इनमें चेहरे का एक तरफ झुकना, एक हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने या समझने में परेशानी, अचानक धुंधला दिखना, संतुलन बिगड़ना और तेज चक्कर आना शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें. लक्षण कुछ मिनट बाद अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी अस्पताल जाना जरूरी है. यह मिनी स्ट्रोक यानी ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकता है, जो भविष्य में बड़े स्ट्रोक का चेतावनी संकेत है.
क्या करें: लक्षण शुरू होने का समय नोट करें और एंबुलेंस बुलाएं. मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय इमरजेंसी सहायता लें.
हाई BP दिमाग की नसों को चुपचाप नुकसान पहुंचाता है
डॉ. विपुल गुप्ता कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में से एक है. लंबे समय तक बीपी बढ़ा रहने से नसों पर दबाव पड़ता है. इससे नसों के कमजोर होने, उनमें रुकावट आने या उनके फटने का खतरा बढ़ सकता है. परेशानी यह है कि हाई बीपी के मामले में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते. इसलिए सिर्फ अच्छा महसूस होने के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि बीपी सामान्य है.
क्या करें: नियमित रूप से बीपी चेक करें, नमक सीमित रखें, शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें. बीपी की दवा खुद से बंद न करें.

स्मोकिंग से लेकर घंटों बैठे रहने तक, ये आदतें भी बढ़ाती हैं खतरा
हमारी रोजमर्रा की कई आदतें दिमाग की सेहत को प्रभावित करती हैं. स्मोकिंग से खून की नलियों को नुकसान पहुंचता है और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है. लंबे समय तक बैठे रहने और एक्सरसाइज नहीं करने से मोटापा, हाई बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ज्यादा नमक, अनहेल्दी फैट और शराब का अत्यधिक सेवन भी स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.
क्या करें: स्मोकिंग छोड़ें, नियमित व्यायाम करें, लंबे समय तक बैठने के बीच छोटे ब्रेक लें और संतुलित भोजन करें. शराब से परहेज करना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
30 की उम्र में भी हो सकता है स्ट्रोक
यह मानना गलत है कि स्ट्रोक सिर्फ बढ़ती उम्र में होता है. डायबिटीज और बढ़ा हुआ LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल कम उम्र में भी ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं. खून में शुगर लंबे समय तक बढ़ी रहने से नसों की अंदरूनी परत प्रभावित हो सकती है. वहीं, कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होकर खून के बहाव को रोक सकता है. अगर इसके साथ हाई बीपी, मोटापा या स्मोकिंग की आदत भी है, तो खतरा और बढ़ सकता है.
क्या करें: समय-समय पर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं. खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से इलाज लें.
माइग्रेन है या स्ट्रोक? लक्षणों में अंतर समझना जरूरी
माइग्रेन और स्ट्रोक के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जैसे नजर में बदलाव, सुन्नपन और बोलने में परेशानी. लेकिन स्ट्रोक में चेहरे का अचानक टेढ़ा होना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या अचानक देखने और बोलने में दिक्कत जैसे संकेत सामने आ सकते हैं. माइग्रेन में सिरदर्द के साथ मतली, रोशनी से परेशानी और कभी-कभी धीरे-धीरे विकसित होने वाले दृश्य लक्षण हो सकते हैं. फिर भी, केवल लक्षणों के आधार पर दोनों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता.
क्या करें: पहली बार ऐसे लक्षण हों, वे सामान्य से अलग हों या अचानक शुरू हुए हों, तो उन्हें माइग्रेन मानकर इंतजार न करें. तुरंत इमरजेंसी सहायता लें.
दिमाग की सेहत बिगाड़ सकती हैं ये आदतें
नींद की कमी: लगातार कम या खराब नींद से ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकते हैं.
अनहेल्दी डाइट: ज्यादा नमक, ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है.
शारीरिक गतिविधि की कमी: घंटों बैठे रहने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है.
स्मोकिंग: तंबाकू रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है.
बीमारियों को नजरअंदाज करना: हाई बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का इलाज न कराना लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है.
लगातार तनाव: लंबे समय तक तनाव रहने से नींद, खानपान और बीपी पर असर पड़ सकता है.
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित भोजन करें और जरूरी स्वास्थ्य जांच कराते रहें.
स्ट्रोक होने पर घर में क्या करें और क्या नहीं?
स्ट्रोक का शक होने पर सबसे जरूरी काम है तुरंत एंबुलेंस बुलाना. मरीज को सुरक्षित जगह पर रखें और उसकी सांस पर नजर रखें. अगर वह बेहोश है, तो मुंह से पानी, खाना या दवा न दें, क्योंकि निगलने में परेशानी होने पर ये चीजें सांस की नली में जा सकती हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन जैसी दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक खून की नस बंद होने के साथ-साथ नस फटने से भी हो सकता है. दोनों स्थितियों का इलाज अलग होता है.
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