scorecardresearch
भारत

भारत में जन्मी पहली मादा चीता 'मुखी' हुई 3 साल की, अब तक का सफर रहा शानदार

Cheetah Mukhi Turns 3
1/6

देश की धरती पर बने चीतों के पहले घर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी पहली मादा शावक 'मुखी' ने रविवार को अपने जीवन के तीन साल पूरे कर लिए है. भारत में जन्मी पहली मादा चीता के रूप में मुखी अब चीता पुनर्स्थापन परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है. इस खास मौके पर कूनो प्रबंधन ने मुखी के एक शावक से मां बनने तक कि सफल जीवन यात्रा और उसके संघर्ष की कहानी बयां करती तस्वीरे जारी की है. वहीं सीएम ने भी सोशल मीडिया पर मुखी से जुड़ी खबर को शेयर कर खुशी जताई है.

Cheetah Mukhi Turns 3
2/6

सीएम डॉ मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुनो से खुशखबरी! भारत की पहली चीता, 'मुखी', आज तीन साल की हो गई है. एक नन्ही शावक से एक आत्मविश्वासी मां बनने तक का उसका सफर, प्रोजेक्ट चीता की सफलता का एक सशक्त प्रतीक है. यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा और बढ़ते आत्मविश्वास का मार्ग प्रशस्त करती है.

Cheetah Mukhi Turns 3
3/6

चीता मुखी का जन्म मार्च 2023 में उस समय हुआ था,जब नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो में बसाने की प्रक्रिया चल रही थी. उस दौरान नए माहौल, मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. जन्म के बाद मुखी की शुरुआत बेहद कठिन रही. उसकी मां 'ज्वाला' ने उसे छोड़ दिया था, जबकि उसके भाई-बहन तेज गर्मी के कारण जीवित नहीं रह पाए. ऐसे हालात में कूनो की टीम और वेटेरियन ने मुखी को बचाया और लगातार निगरानी में रखकर उसे पाला. यही कारण है कि आज उसे कूनो पार्क की सबसे मजबूत मादा चीता माना जाता है.

Cheetah Mukhi Turns 3
4/6

मुखी वक्त के साथ बनी धाकड़ शिकारी
वक्त के साथ चीता मुखी ने स्वयं को पूरी तरह जंगल के माहौल में ढाल लिया है. अब वह एक स्वस्थ वयस्क चीता है और शिकार करने में भी माहिर हो चुकी है. वन अधिकारियों के अनुसार, उसका व्यवहार इस बात का संकेत है कि कूनो का वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है.
 

Cheetah Mukhi Turns 3
5/6

नवंबर 2025 में 05 शावकों को दिया था जन्म
मुखी ने 33 महीने की उम्र में नवंबर 2025 में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया. यह देश में चीतों की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत मानी जा रही है. खास बात यह है कि मुखी अपने शावकों की देखभाल खुद कर रही है, जो जंगल में किसी भी प्रजाति के टिके रहने के लिए बेहद जरूरी है.
 

Cheetah Mukhi Turns 3
6/6

प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने फोन कॉल बताया कि मुखी की कहानी पूरे प्रोजेक्ट के लिए माइल स्टोन है. कठिन परिस्थितियों में उसका जीवित रहना और अब मां बनना यह दिखाता है कि कूनो पार्क का इकोसिस्टम चीतों के लिए अनुकूल है.

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने फोन कॉल पर कहा कि मुखी का व्यवहार, शिकार करने की क्षमता और अपने शावकों की देखभाल इस प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता है. इससे साफ है कि चीतों ने यहां खुद को स्थापित करना शुरू कर दिया है.

-खेमराज दुबे