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भारत

पराशर की पहाड़ियों पर मिली दुर्लभ हिमालयन रेड फॉक्स, दुर्गम क्षेत्रों में पाई जाती है ये

Rare Himalayan Red Fox
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हिमाचल प्रदेश की समृद्धशाली जैव विविधता का अनूठा नजारा उस समय सामने आया जब एक वन्यजीव फोटोग्राफर ने मंडी जिला में पराशर की पहाड़ियों पर दुर्लभ 'हिमालयन रेड फॉक्स' को कैमरे में कैद कर लिया. रेड फॉक्स की यह दुर्लभ फुटेज मंडी जिला में मौजूद समृद्ध वन्यजीव विरासत को दर्शाने और इनके संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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जिला के प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल पराशर झील के समीपवर्ती वन क्षेत्र में एक अत्यंत दुर्लभ हिमालयन रेड फॉक्स देखी गई है. मंडी के वन्यजीव फोटोग्राफर और जीव विज्ञान प्रवक्ता सूरज भाटिया ने इस शानदार जीव को अपने कैमरे में उस समय कैद कर लिया जब वह पहाड़ी की चोटी पर आराम कर रही थी. उनके अनुसार यह लाल लोमड़ी पराशर के पास एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर धूप सेंकते हुए आराम कर रही थी.

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आमतौर पर इंसानी आहट मिलते ही भाग जाने वाला यह जीव काफी देर तक वहां बैठा रहा मानो तस्वीरें खींचने और वीडियो रिकॉर्ड करवाने का पर्याप्त समय देकर अपने अस्तित्व का पुख्ता सबूत मुहैया करवा रहा हो. वह बताते हैं कि अपनी सुनहरी-लाल फर और लंबी झाड़ीदार पूंछ के साथ यह लोमड़ी बर्फबारी के बाद खिली धूप का आनंद ले रही थी. सूरज ने बताया कि हालांकि पहाड़ी लाल लोमड़ी (वुल्पस मोंटाना) अक्सर स्पीति, किन्नौर और लाहौल जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है.

Rare Himalayan Red Fox
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लेकिन, मंडी जिले के पराशर जैसे क्षेत्रों (लगभग 2,730 मीटर की ऊंचाई) में इसकी मौजूदगी एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (ईको सिस्टम) का संकेत है. इस क्षेत्र में रेड फॉक्स का दिखना यह दर्शाता है कि यहां इनके लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि पहाड़ी लाल लोमड़ी पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह मुख्य रूप से चूहों और अन्य हानीकारक जीवों का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रित रखती है. पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी उपस्थिति यह बताती है कि पराशर के आसपास का जंगल अभी भी अपनी प्राकृतिक स्थिति में है.

रेड फॉक्स की इस दुर्लभ साइटिंग के बाद उन्होंने अपील की है कि इस पर्यटन स्थल पर पहुंचने वाले पर्यटक वन्यजीवों के करीब जाकर उन्हें परेशान न करें और न ही वे इन जंगली जानवरों को किसी भी प्रकार का खाद्य पदार्थ दें, क्योंकि इससे वे इंसानों पर निर्भर हो सकते हैं. इसके अलावा पराशर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कचरा व गंदगी न फैलाएं जिससे इन जीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित और संरक्षित रह सके.

-धर्मवीर की रिपोर्ट