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भारत

Nadiha Baroyari Durga Puja: स्थापना के 100 साल पूरे होने पर खास सजावट, टेराकोटा कला की शैली में सजा नडिहा बारोयारी का मंडप

महाषष्ठी से पहले ही दुर्गापूजा की रौनक
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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में दुर्गापूजा का उत्साह देखने को मिल रहा है. तृतीया की शाम से ही पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है. पुरुलिया की चर्चित बारोयारी दुर्गापूजाओं में नडिहा बारोयारी दुर्गापूजा कमेटी खास आकर्षण का केंद्र है. इस बार कमेटी अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है.
 

शताब्दी वर्ष पर खास सजावट
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नडिहा बारोयारी के स्थायी दुर्गा मंडप को इस बार टेराकोटा कला की शैली में सजाया गया है. इसकी सजावट में बंगाल की पारंपरिक कला की झलक देखने को मिल रही है. पंडाल की सजावट में स्थानीय सांस्कृतिक शैली को भी शामिल किया गया है. पारंपरिक कला और शिल्प का यह मेल मंडप को खास रूप दे रहा है.
 

पारंपरिक अंदाज में मां दुर्गा की प्रतिमा
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पंडाल की थीम के अनुरूप सुबक़ी अंदाज की पारंपरिक दुर्गा प्रतिमा तैयार की गई है. मंडप और प्रतिमा की सजावट में बारीक कलाकारी का इस्तेमाल हुआ है. मंडप और प्रतिमा पर पारंपरिक शिल्प की बारीकियां देखने को मिल रही हैं. सजावट श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है.
 

तृतीया से ही पहुंचने लगे श्रद्धालु
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तृतीया की शाम से नडिहा बारोयारी पूजा मंडप में लोगों की आवाजाही बढ़ गई. स्थानीय लोग पंडाल देखने और मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. स्थापना के 100 साल पूरे होने पर नडिहा बारोयारी दुर्गापूजा कमेटी खास आयोजन कर रही है. शताब्दी वर्ष में मंडप की सजावट को विशेष रूप दिया गया है.
 

टेराकोटा कला का अनोखा मेल
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पारंपरिक बंगाली कला और टेराकोटा शैली इस बार पूजा मंडप की खास पहचान है. सजावट में स्थानीय संस्कृति और शिल्प का मेल देखने को मिल रहा है. 100 साल की परंपरा और टेराकोटा कला के अनोखे मेल ने नडिहा बारोयारी दुर्गापूजा को खास बना दिया है. इस बार यह पुरुलिया शहर की प्रमुख पूजा आकर्षणों में शामिल है.