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भारत

World Heritage Day: World Heritage Day: मार्तंड सूर्य मंदिर से लेकर कालिंजर तक, वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में होने चाहिए ये स्मारक

heritage
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हर साल 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनियाभर के विरासत स्थलों के महत्व को उजागर करना और अगली पीढ़ियों को इस धरोहर से रू-ब-रू करना है. विश्व विरासत दिवस मनाने का विचार 1982 में स्मारकों और स्थलों पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) द्वारा प्रस्तावित किया गया था और बाद में 1983 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनुमोदित किया गया था. साल 2022 तक भारत में 40 यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं. और आज हम आपको बता रहे हैं भारत के कुछ ऐसे स्मारकों और इमारतों के बारे में जिन्हें World Heritage Sites की लिस्ट में शामिल होना चाहिए. (Photo: Wikipedia)

Sher shah
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शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में स्थित है. इसे शेर शाह के सम्मान में बनवाया गया था. उन्हें भारत के महानतम सम्राटों और प्रशासकों में से एक माना जाता है. शेरशाह सूरी का मकबरा प्राचीन वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है, इसमें इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के तत्व हैं जिनमें बड़े खुले आंगन, ऊंचे गुंबद और स्तंभ शामिल हैं. इसमें अफगान वास्तुकला के संकेत भी हैं. यह खूबसूरत संरचना तीन मंजिला ऊंचा मकबरा (लगभग एक सौ बाईस फीट) है. यह मकबरा एक कृत्रिम चौकोर आकार की झील के बीच में स्थित है. मीर मोहम्मद अलीवाल खान ने मकबरे को डिजाइन किया था जो 1540 और 1545 के बीच पूरा हुआ था. 'दूसरा ताजमहल' मकबरे का दूसरा नाम है. (Photo: Sasaram Website)

sun temple
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मार्तंड सूर्य मंदिर, सूर्य को समर्पित एक शानदार मंदिर है जो भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग से पांच मील की दूरी पर स्थित है. यह एक कश्मीरी हिंदू मंदिर है और इसे भारत में अब तक निर्मित सबसे सुंदर संरचनाओं में से एक के रूप में जाना जाता है. जीर्ण-शीर्ण अवस्था में भी, मंदिर अपने वैभव की छाप छोड़ता है. मार्तंड सूर्य मंदिर का निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुआ था. मार्तंड, संस्कृत में, हिंदू धर्म में सूर्य भगवान का दूसरा नाम है. मंदिर परिसर का निर्माण राजा ललितादित्य ने करवाया था जो कर्कोटा राजवंश के तीसरे शासक थे. इसकी संरचना चूना पत्थर से निर्मित है, और पूरे परिसर को अनंतनाग के पास एक पठार के ऊपर बनाया गया है. भारत सरकार ने खंडहर हो चुके मंदिर परिसर को पर्यटकों के लिए खोल दिया है. (Photo: Wikipedia)

ratnagiri
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रत्नागिरी, जाजपुर, ओडिशा में स्थित एक प्राचीन बौद्ध विरासत स्थल है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि इस शहर की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त राजाओं के शासन में हुई थी. एक समय रत्नागिरी महायान बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र था. यहां मौजूद कई मूर्तियां महायान प्रभाव दिखाती हैं. बाद में, रत्नागिरी बौद्ध धर्म के तांत्रिक रूप वज्रयान के जन्मस्थान में बदल गया - जिसके प्रमाण मूर्तियों में देखे जा सकते हैं. रत्नागिरी, ओडिशा  में 5वीं और 12वीं सदी के बीच फला-फूला. (Photo: Wikipedia)

hoyasala
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होयसलेश्वर मंदिर, जिसे 'हलेबिडु' मंदिर भी कहा जाता है, 12वीं शताब्दी का मंदिर है. यह भगवान शिव को समर्पित है. ऐसा कहा जाता है कि यह कर्नाटक के एक कस्बे और होयसाल साम्राज्य की तत्कालीन राजधानी हलेबिडु में सबसे बड़ा स्मारक है. होयसलेश्वर मंदिर शैव धर्म परंपरा का पालन करता है, लेकिन इसमें वैष्णववाद और शक्तिवाद के विषयों के साथ-साथ जैन धर्म की छवियां भी शामिल हैं. मंदिर के अंदर की मूर्तियां रामायण, महाभारत और भागवत पुराण के दृश्यों को दर्शाती हैं. (Photo: Wikipedia)

deccan
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दक्कन सल्तनतें दक्कन के पठार पर स्थित थीं. उनकी वास्तुकला इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का एक क्षेत्रीय रूप थी, जो दिल्ली सल्तनत और बाद में मुगल वास्तुकला की शैलियों से काफी प्रभावित थी, लेकिन कभी-कभी सीधे फारस और मध्य एशिया से भी मिलती थी. दक्कन सल्तनतों ने कई भव्य और अभेद्य किलों का निर्माण किया हैय बीदर और गोलकुंडा के किले दक्कन सल्तनतों की सैन्य योजना के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। किलों के अलावा उन्होंने कई मकबरे, मस्जिद और मदरसे बनवाए हैं. गोल गुंबज (मोहम्मद आदिल शाह का मकबरा), दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद था. (Photo: Wikipedia)

kalinjar
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बुंदेलखंड क्षेत्र के ताराहटी गांव में स्थित कालिंजर का किला महान ऐतिहासिक महत्व का स्मारक है. यह किला, विंध्य रेंज की एक अलग सपाट-चोटी वाली पहाड़ी पर स्थित है. एक गिरि दुर्ग (पहाड़ी किला) और एक वन दुर्ग (जंगल का किला) की विशेषताओं को मिलाकर, कालिंजर का किला एक दुर्जेय रक्षात्मक संरचना है. भव्यता और कलात्मकता के मामले में यह भवन अपने समय के अन्य स्मारकों से अलग है. कालिंजर के मुख्य आकर्षणों में से एक नीलकंठ मंदिर है. इसे चंदेल शासक परमादित्य देव ने बनवाया था. मंदिर में 18 भुजाओं वाली विशालकाय मूर्ति के अलावा शिवलिंग नीले पत्थर का है. मंदिर के रास्ते में पत्थरों पर भगवान शिव, काल भैरव, गणेश और हनुमान की मूर्तियां उकेरी गई हैं. (Photo: Wikipedia)

sirpur
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सिरपुर, छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित एक छोटा सा गांव है, जो महानदी नदी के तट पर स्थित है. यह महासमुंद जिले से 35 किमी और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर से लगभग 78 किमी दूर है. सिरपुर-छत्तीसगढ़ का बौद्ध मठ, जो 8वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व का है. यह भारत में सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध मठों में से एक है. साइट में 100 बुद्ध विहार, 4 जैन विहार, 200 टीले और 100 से अधिक शिव मंदिरों के अवशेष शामिल हैं. (Photo: Wikipedia)