गुजरात के मोढेरा का सूर्य मंदिर (फाइल फोटो)
गुजरात के मोढेरा का सूर्य मंदिर (फाइल फोटो)
भारत के 3 सांस्कृतिक जगहों को यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित लिस्ट में शामिल किया गया है. इसमें मोढेरा का सूर्य मंदिर, गुजरात का ऐतिहासिक वडनगर शहर और त्रिपुरा में उनाकोटी की चट्टानों को काटकर बनाई गई मूर्तियां शामिल हैं.
3 जगह यूनेस्को की अस्थाई लिस्ट में-
इन जगहों को यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोशल मीडिया पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि बधाई हो भारत! भारत ने यूनेस्को की अस्थाई सूची में 3 और स्थल जोड़े हैं. पहला गुजरात का वडनगर बहुस्तरीय ऐतिहासिक शहर, दूसरा मोढेरा का सूर्य मंदिर और तीसरा उनाकोटी जिले की उनाकोटी श्रृंखला में पत्थरों पर उकेरी गई मूर्तियां.
केंद्रीय मंत्री के ट्वीट पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कहा कि इससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा. एएसआई ने कहा कि मोढेरा का सूर्य मंदिर और आसपास के स्मारक, उनाकोटी की मूर्तियां और वडनगर शहर को यूनेस्को की संभावित लिस्ट में शामिल होने से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन मिलेगा.
मोढेरा के सूर्य मंदिर में क्या है खास-
गुजरात के मोढेरा में सूर्य मंदिर स्थिति है. इसका निर्माण 1026 ई. में किया गया था. इसका निर्माण सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने कराया था. इसका निर्माण इस तरीके से हुआ है कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक इसपर सूर्य की किरणें पड़ती हैं. सूर्य मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर नक्काशी की गई है. यह मंदिर 3 हिस्सों में बंटा है. इसमें सूर्य कुंड, सभा मंडप और गूढ़ मंडप है. कुंड तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं.
उनाकोटी की मूर्तियों की खास बातें-
त्रिपुरा के उनाकोटी जिले में पत्थरों को काटकर मूर्तियां बनाई गई हैं. कहा जाता है कि यहां कुल 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं. इन मूर्तियों को किसने बनाया है और कब बनाया. इसके कोई सबूत नहीं हैं. ये एक रहस्य है. रहस्यमयी होने की वजह से इसे उनाकोटी नाम दिया गया है. इसका अर्थ करोड़ में एक कम होता है. यहां दूर-दूर तक घने जंगल और दलदली जमीन है.
उनाकोटी से जुड़ी है भगवान शिव की कहानी-
मान्यता है कि एक बार भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ कहीं जा रहे थे. जब रात हो गई तो सभी देवताओं ने भगवान शिव को उनाकोटी में विश्राम करने को कहा. भगवान शिव मान गए. लेकिन उन्होंने कहा कि सूर्योदय से पहले सभी को ये जगह छोड़नी होगी. लेकिन जब सुबह हुई तो सिर्फ भगवान शिव ही जाग पाए. बाकी लोग सो रहे थे. इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और सभी को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया. इससे लिए यहां एक करोड़ में एक कम मूर्तियां हैं.
वडनगर शहर क्यों है खास-
गुजरात का वडनगर एक छोटा सा शहर है. पुरातत्व विशेषज्ञों की माने तो ये शहर 2 हजार साल पुराना है. वडनगर में खुदाई में बौद्ध काल के अवशेष मिले हैं. जिसमें गुप्त काल की बुद्ध की एक प्रतिमा, खोल चूड़ियां, कलाकृतियां और स्तूप मिले हैं. 12वीं सदी में कुमारपाल राजा ने शहर के चारों तरफ दीवारें बनवाई थीं. जिसमें 6 दरवाजे थे. माना जाता है कि मध्यकालीन युग में यहां 3 हजार से ज्यादा मंदिर थे.
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