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सहारनपुर के बेटे ने रचा इतिहास... पिता का अधूरा सपना पूरा कर नेशनल शूटिंग में जीता गोल्ड मेडल

अफजाल अहमद ने बताया कि उन्हें शूटिंग का जुनून अपने पिता से मिला. उनके पिता मोहम्मद इकबाल खुद भी शूटिंग किया करते थे और नेशनल लेवल तक पहुंचने का सपना देखते थे. बचपन में पिता को शूटिंग रेंज जाते, मेडल और गिफ्ट्स लाते देख अफजाल को भी इस खेल से लगाव हो गया.

Afzal Ahmad Afzal Ahmad

सहारनपुर के रहने वाले स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल के बेटे अफजाल अहमद ने जिले का नाम पूरे देश में रोशन किया है. दिल्ली में आयोजित 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए अफजाल ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह प्रतियोगिता 1 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक चल रही हैजिसमें देशभर से सैकड़ों शूटर्स ने हिस्सा लिया. अफजाल ने शूटिंग गेम में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है.

बेटे ने किया पिता का सपना पूरा
अफजाल अहमद ने बताया कि शूटिंग का जुनून उन्हें अपने पिता से मिला. उनके पिता खुद भी शूटिंग करते थे और हमेशा चाहते थे कि नेशनल लेवल तक पहुंचे. बचपन से पिता को शूटिंग करते देखना ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना. हालांकि आर्थिक हालात के चलते उनके पिता अपना सपना पूरा नहीं कर सके, लेकिन बेटे ने वही सपना साकार कर दिखाया.

नंबर 1 बनना किसी सपने से कम नहीं था
अफजाल ने बताया कि नेशनल लेवल पर गोल्ड जीतना आसान नहीं होता. सैकड़ों खिलाड़ियों में से टॉप-6 में पहुंचना और फिर नंबर 1 बनना किसी सपने से कम नहीं था. उन्होंने बताया कि अब तक वे सैकड़ों प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और 100 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं, लेकिन नेशनल गोल्ड उनके लिए सबसे खास है.

पिता को याद कर भावुक हुए अफजाल
गोल्ड जीतने के बाद भावुक हुए अफजाल ने कहा कि काश आज उनके पिता जिंदा होते तो सबसे ज्यादा खुश वही होते. उन्होंने बताया कि जीत के बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई, क्योंकि मन बार-बार उसी पल को दोहरा रहा था. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनकी मेहनत नहीं, बल्कि मां की दुआ, परिवार का साथ और ऊपरवाले की कृपा है.

खुद शूटिंग की कोचिंग देते हैं अफजाल
अफजाल अहमद ने बताया कि उनका सपना सिर्फ खुद तक सीमित नहीं है. वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे शूटिंग जैसे खेलों से जुड़ें. कुम्हारहेड़ा स्थित शूटिंग रेंज में वह खुद कोचिंग देते हैं और बच्चों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश के लिए खेलें और तिरंगे के लिए और भी मेडल जीतें.