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उत्तर प्रदेश के देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है. मामले की सुनवाई के दौरान देवरिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर और गौरी बाजार थाने के प्रभारी अदालत में पेश हुए. पुलिस की ओर से थाने का सीसीटीवी कैमरा खराब होने और फुटेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दिए जाने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया.
एसपी ने बिना शर्त मांगी माफी
अदालत ने सवाल किया कि पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी व्यवस्था में इतनी बड़ी खामी के बावजूद संबंधित एसएचओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई. पुलिस अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया. सुनवाई के दौरान एसपी देवरिया ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी. इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि माफी अदालत से नहीं, बल्कि उन लोगों से मांगिए, जिन्हें कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया. 13 से 24 अप्रैल तक हिरासत में रखने का आरोप है.
लगाए थे आरोप
मामला देवरिया के गौरी बाजार पुलिस स्टेशन से जुड़ा है. महेंद्र गौर और तीन अन्य की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्हें 13 अप्रैल से 24 अप्रैल तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया. मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस से हिरासत की अवधि से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी तलब की थी. फुटेज को लेकर पुलिस की ओर से कैमरा खराब होने की बात सामने आने के बाद अदालत ने एसपी देवरिया और थाने के प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान दोनों अधिकारी अदालत के समक्ष उपस्थित हुए.
एसएचओ के वेतन से दिया जाएगा मुआवजा
अदालत ने मामले में चारों याचियों को राहत देते हुए राज्य सरकार को तीन याचियों को 20-20 हजार रुपए और चौथे याची को पांच हजार रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया. कुल 65 हजार रुपए की मुआवजा राशि एसएचओ के वेतन से वसूल कर दिए जाने का आदेश किया गया है. मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई. कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और मुआवजे के आदेश से पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई है.