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Allahabad High Court Verdict: क्या पति की मौत के बाद गोद लिए बच्चे को मिलेगा संपत्ति में हक? जानें इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

जिन लोगों के भी मन में ये सवाल आता है कि क्या पति के मौत के बाद गोद लिए हुए बच्चे को क्या उसके पति के संपत्ति में हिस्सा मिलेगा? या क्या वह बच्चा उसके प्रॉपर्टी का पूर्णता वारिस होगा? इसी मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट

किसी परिवार में पति की मौत के बाद अगर उसकी पत्नी किसी बच्चे को गोद लेती है, तो क्या उस बच्चे का मृतक पति की संपत्ति पर भी अधिकार होगा? इस सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिया गया बच्चा सिर्फ महिला का ही बेटा नहीं माना जाएगा, बल्कि उसे मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा. ऐसे बच्चे को पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा.

पति की मौत के बाद विधवा ने लिया था बच्चा गोद
यह मामला प्रयागराज से जुड़ा है. कोर्ट में राम कृपाल की ओर से साल 1983 में याचिका दाखिल की गई थी. इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मोती रानी और उनके दिवंगत पति मुरलीधर के गोद लिए हुए बेटे रामजी को मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकार का हक दिया गया था. मामले के मुताबिक, मुरलीधर की मौत के समय उनकी कोई संतान नहीं थी. उनकी मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति में हिस्सा उनकी पत्नी मोती रानी को मिला था. इसके बाद रामजी ने दावा किया कि मोती रानी ने उन्हें 2 अगस्त 1960 को विधिवत गोद लेने के विलेख के जरिए गोद लिया था. इसी आधार पर उन्होंने मुरलीधर की संपत्ति में अपना उत्तराधिकार का अधिकार बताया.

चकबंदी अधिकारी के आदेश को दी गई थी चुनौती
राम कृपाल ने चकबंदी अधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें रामजी को मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकारी माना गया था. मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने की. कोर्ट ने 30 जुलाई के अपने फैसले में राम कृपाल की याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने माना कि चकबंदी अधिकारियों ने रामजी को मोती रानी और मुरलीधर के गोद लिए हुए पुत्र के तौर पर उत्तराधिकार देने में कोई कानूनी गलती नहीं की थी.

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी दिया हवाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सावन राम बनाम कलावंती मामले के फैसले का भी हवाला दिया. कोर्ट ने इसी कानूनी आधार पर माना कि विधवा द्वारा पति की मृत्यु के बाद लिया गया गोद का बच्चा मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा.

हाईकोर्ट ने सुभाष मिसिर मामले में दिए गए एक अन्य फैसले का भी जिक्र किया. उस फैसले में कहा गया था कि विधवा द्वारा गोद लिया गया बेटा उसके मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा और विधवा की मृत्यु के बाद वह पति की संपत्ति का वैध उत्तराधिकारी होगा.

कोर्ट ने क्या साफ किया?
इस पूरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने गोद लिए गए बच्चे के उत्तराधिकार के अधिकार को स्पष्ट किया है. कोर्ट के मुताबिक, पति की मौत के बाद विधवा अगर कानूनी तरीके से किसी बच्चे को गोद लेती है, तो उस बच्चे को मृतक पति का भी बेटा माना जाएगा और उसे पति की संपत्ति में उत्तराधिकार मिल सकता है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राम कृपाल की याचिका खारिज कर दी.
 

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