राजस्थान में हो रही चंदन की खेती
राजस्थान में हो रही चंदन की खेती
दक्षिण भारत में होने वाले चंदन के पौधों की खेती अब राजस्थान के अलवर में भी होने लगी है. यहां चंदन के पेड़ लहराने लगे हैं. चंदन के पौधे लगाने वाले किसानों से मिलने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण आ रहे हैं. किसानों ने यूट्यूब और सोशल मीडिया की मदद से चंदन की खेती के बारे में जानकारी इकट्ठा की. इसके बाद पौधे लगाने, पौधों के रखरखाव सहित खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी जुटाई और फिर चंदन के पौधों की खेती शुरू की. किसानों के लिए यह खेती फायदेमंद साबित हो रही है. अलवर के राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और मालाखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों किसान चंदन के पौधे लगा रहे हैं और इसकी खेती कर रहे हैं.
किसान ने लगाए चंदन के 300 पौधे
अलवर जिले की लक्ष्मणगढ़ तहसील के मलावाली गांव में रहने वाले किसान रामकृष्ण मीणा ने अपने खेत में चंदन के 300 पौधे लगाए हैं. आज तक से बातचीत करते हुए रामकिशन ने बताया कि सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने चंदन के पौधे लगाने का फैसला लिया. 2023 में वह सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हुए. उससे पहले ही उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. उन्होंने अपने खेत की मिट्टी जांच के लिए पहले दिल्ली भेजी और वहां लैब की रिपोर्ट आने के बाद उस मिट्टी को बेंगलुरु भेजा. वहां उस मिट्टी में चंदन के पौधे लगाए गए. जब पौधे 4 से 5 फुट लंबे हो गए और कुछ बड़े हुए, तो उन पौधों को लाकर गांव की मिट्टी में लगाया गया. पौधे अब बड़े हो चुके हैं और लगातार उनकी अच्छी ग्रोथ हो रही है.
अब तक 10 हजार से ज्यादा पौधे लगाए
रामकिशन ने बताया कि उन्होंने अपने जैसे सैकड़ों किसानों की मदद की है. अभी तक अलवर के आसपास के क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं. चंदन के पौधों से किसानों को फायदा होता है. उनका मन था कि पारंपरिक खेती से हटकर कुछ अलग काम करें. इसलिए उन्होंने चंदन के पौधे लगाने का फैसला लिया.
सोशल मीडिया से मिली चंदन की खेती की जानकारी
रामकिशन ने बताया कि उन्होंने इन पौधों को आंध्र प्रदेश से मंगवाया था. आज दूर-दूर से किसान उनसे चंदन की खेती के बारे में पूछने के लिए आते हैं. उन्होंने चंदन के पौधे लगाने से पहले सोशल मीडिया पर रिसर्च की. यूट्यूब पर वीडियो देखे. इसके अलावा Google पर चंदन के पौधे लगाने के तरीके और उनके रखरखाव के बारे में जानकारी तलाश की. इसके बाद उन्होंने चंदन के पौधे लगाने का काम शुरू किया. जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर लोग फालतू की रील देखते रहते हैं, वहीं रामकिशन ने सोशल मीडिया को अपनी मदद का सहारा बनाया. आज सोशल मीडिया की मदद से रामकिशन चंदन की खेती कर रहे हैं.
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