scorecardresearch

छात्र आंदोलन के बीच RSS को मिला मौका, अयोध्या में संवादहीनता दूर करने में जुटा संगठन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राम मंदिर में चंदा चोरी मामले के बाद अयोध्या में हर स्तर पर मंथन कर रहा है. आरएसएस साधु-संतों से लेकर पत्रकारों तक से मुलाकात कर रहा है, ताकि चंदा चोरी मामले के बाद जो संवादहीनता बनी थी, उसे फिर से पटरी पर लाया जा सके.

Mohan Bhagwat Mohan Bhagwat

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी ने संघ परिवार को भी मंथन पर मजबूर कर दिया है कि गलती कहां हुई? अब RSS के भीतर इस बात पर मंथन हर स्तर पर चल रहा है कि आखिर जिस आंदोलन ने पूरे भारत में भाजपा को सत्ता दे दी, जिस आंदोलन ने देश को राम मंदिर दे दिया, उस राम मंदिर में संघ परिवार से कहां चूक हो गई. जिससे इतनी बदनामी व्यक्ति से लेकर संगठन तक की हो गई.

राम मंदिर में हुई किरकिरी के बाद अब संघ हर स्तर पर संवाद में जुटा है, लखनऊ में संघ के पदाधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में एक बात मान ली है कि ट्रस्ट की तरफ से संवादहीनता और पारदर्शिता की कमी इस हालत की सबसे बड़ी वजह है.

RSS का हर स्तर पर संवाद-
संघ ने यह भी माना कि जब ट्रस्ट ने खुद से चंदा चोरी पकड़ ली तो खुद पुलिस बनने की बजाय उसे पुलिस में FIR करनी चाहिए थी. जिससे समाज में खराब संदेश नहीं जाता और बात चोरी तक रह जाती और ट्रस्ट की भी इतनी भद नहीं पिटती.

आरएसएस अब मंदिर, ट्रस्ट और और हिंदू समाज के भीतर चढ़ावा चोरी को लेकर फैले आशंकाओं, चिंताओं को ठीक करने में जुटा है और इसके लिए हर स्तर पर संवाद चल रहा है.

संघ ने सबसे पहले साधु संतों के बीच फैले संवादहीनता, आशंकाओं और गुस्से को खत्म करने की पहल की, खासकर अयोध्या के साधु संत, जो ट्रस्ट से बेहद नाराज थे, खासकर चंपत राय के कामकाज के तौर तरीकों से बेहद खफा थे, उनपर काम किया और लगभग महीने भर के मशक्कत के बाद ट्रस्ट की दूसरी बैठक में अयोध्या के सभी बड़े संत और मठों को अपने पाले में करने में सफल हुआ. जब ट्रस्ट के भीतर नई धार्मिक समिति बनी तो राम मंदिर में अयोध्या के साधु संतों का बोलबाला हो गया, अब अयोध्या के नाराज साधु संत खुश हैं और संघ और सरकार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.

चोरी पर क्या मानता है संघ?
अब दूसरी कड़ी में संघ की तरफ से पत्रकारों के बीच फैले संवादहीनता को भी कम करने की कोशिश दिखाई दी. आरएसएस के अखिल भारतीय संचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से अनौपचारिक मुलाकात की जबकि कई और संघ के चेहरे पत्रकारों से अलग-अलग स्तर पर संवाद करते दिखाई दिए. संघ ने यह माना कि राम मंदिर में हुई चोरी बेहद गंभीर है और समाज इसे लेकर बहुत गुस्से में है. लेकिन अनौपचारिक तौर पर संघ ये मानता है कि इस चोरी के सिर्फ वही 6 किरदार हैं, जो सीसीटीवी में 45 दिनों में 70 बार चोरियां करते दिखाई दिये, वही असल चोर हैं और ट्रस्ट के चेहरे इस चोरी में लिप्त नहीं हैं. यही नहीं, संघ ये भी मानता है कि दान पत्र से चोरी की गई रकम 3 करोड़ के आसपास हो सकती है. जिसमें से 80 लाख बरामद की गई है.

संघ की तरफ से एक बात जो इस पूरे चढ़ावा चोरी में मानी गई कि राम मंदिर ट्रस्ट और समाज के बीच एक ऐसी संवादहीनता थी, जिसकी वजह से सच्चाई से ज्यादा अफवाह फैली. चंपत राय की कार्यशैली की सबसे ज्यादा चर्चा दिखाई दी.

पत्रकारों के साथ उनके दुर्व्यवहार पर भी बातें हुई. संघ के भीतर जो समझ है. उसके मुताबिक यह गड़बड़ी बैंक के तरफ से है, ट्रस्ट की ओर से नहीं, क्योंकि चंदा की रकम गिनने वाले बैंक की तरफ से रखे गए एजेंसी के ही लोग थे. संघ के भीतर भी चंपत राय और दूसरे अधिकारियों के कामकाज और तौर तरीकों को लेकर सवाल थे. लेकिन संघ के अधिकारियों ने ऐसे सवालों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहना ही बेहतर समझा. छात्र आंदोलन के बीच संघ परिवार को एक ऐसा सुनहरा अवसर मिल गया, जब अचानक अयोध्या के चढ़ावा चोरी की चर्चा पूरी तरीके से रुक गई. देश का विमर्श मंदिर से हटकर परीक्षा लीक और छात्र आंदोलन पर चला गया, ऐसे में संघ परिवार इस वक्त का फायदा अयोध्या के कील-कांटे दुरुस्त करने के लिए उठा लेना चाहता है, ताकि अगर दोबारा अयोध्या का मुद्दा विमर्श में आए, तब तक गुस्से को शांत किया जा सके.

ये भी पढ़ें: