Forensic Probe to be made compulsory
Forensic Probe to be made compulsory
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र ने भारत की सजा दर को विकसित देशों से भी अधिक करने और आपराधिक न्याय प्रणाली को फोरेंसिक विज्ञान जांच के साथ एकीकृत करने का लक्ष्य रखा है. अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय उन अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य करेगा, जिसमें सजा की अवधि कम से कम 6 साल निर्धारित है. शाह ने ये बयान गांधीनगर के राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्घालय (एनएफएसयू) में रविवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में दिया. केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार आपराधिक मामले में दोष प्रमाणित करने की दर को बढ़ाने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक विज्ञान जांच को जोड़ने का लक्ष्य बना रही है.
रोजगार के अवसर पैदा होंगे
उन्होंने कहा कि सरकार देश के प्रत्येक जिले में एक फोरेंसिक मोबाइल जांच सुविधा प्रदान करेगी और जांच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करेगी.
अमित शाह इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे. उन्होंने कहा कि इन कानूनों को स्वतंत्र भारत के दृष्टिकोण से फिर से तैयार करने की आवश्यकता है इसलिए हम आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए बहुत से लोगों से परामर्श ले रहे हैं. गृह मंत्री ने कहा कि इन परिवर्तनों और फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने से यह फोरेंसिक साइंस पासआउट के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा.
मोबाइल लैब की शुरुआत की
इस मौके पर शाह ने 'मेड इन इंडिया' फोरेंसिक मोबाइल लैब शुरू की और कहा कि ऐसी प्रयोगशालाएं हर जिले में उपलब्ध कराई जाएंगी. वहीं बात अगर कानून में मुख्य बदलाव की करें तो केंद्र सरकार भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम में बदलाव करेगी. शाह ने कहा, "इन कानूनों को स्वतंत्र भारत के नजरिए से फिर से तैयार करने की जरूरत है."
फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत होगा भारत
उन्होंने कहा कि सरकार ने फोरेंसिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, फोरेंसिक जनशक्ति बनाने, फोरेंसिक प्रौद्योगिकी प्रदान करने और फोरेंसिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए देश को फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर शीर्ष स्थान पर ले जाने के लिए काम किया है. इन चार स्तंभों के आधार पर देश के फोरेंसिक विज्ञान क्षेत्र को मजबूत करना होगा. इन चार क्षेत्रों में पिछले तीन वर्षों में काफी काम किया गया है. शाह ने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में कई राज्यों को सहायता प्रदान की है. उन्होंने कहा कि इसके लिए बड़ी संख्या में फॉरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी. शाह ने कहा कि एनएफएसयू से ग्रेजुएशन करने वाला कोई भी छात्र नौकरी से वंचित नहीं रहेगा.
थर्ड डिग्री की जरूरत नहीं
शाह ने आगे आपराधिक न्याय प्रणाली और कानून व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में सुधारों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा,"यह थर्ड डिग्री का जमाना नहीं है. ये हमारे अपने लोग हैं और इनके साथ थर्ड डिग्री के साथ व्यवहार करने की कोई जरूरत नहीं है. हमें वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाने पर जोर देना होगा. इस तरह हम दोषसिद्धि दर बढ़ाने में सक्षम होंगे." थर्ड डिग्री पूछताछ करने का एक तरीका होता है जिसमें संदिग्ध को आरोप न स्वीकार करने पर शारीरिक या मानसिक दर्द देकर उससे पूछताछ की जाती है. इस मौके पर शाह ने एनएफएसयू में डीएनए फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा, और खोजी और फोरेंसिक मनोविज्ञान में उत्कृष्टता के तीन केंद्रों का भी उद्घाटन किया.