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जब सब तमाशा देखते रहे तब मां ने नहीं मानी हार, इस तरह मौत के गोद से खींच लाई बेटे की सांसें

यह घटना भले ही छोटी लग रही हो, लेकिन ये घटना है सूझबूझ और हिम्मत की. एक मां के हिम्मत की जिसमें बेटे को मौत के मुंह से खींच निकाला.

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हाइलाइट्स
  • मां ने नहीं मानी हार

  • मौत से खिच लाई बेटे की सांसे

बागपत की एक सड़क पर अचानक अफरा-तफरी मच गई. जब एक ई-रिक्शा पलट गया और उसके नीचे एक युवक दबा पड़ा था. आसपास भीड़ जमा थी, लेकिन कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था. कुछ लोग सन्न थे, कुछ वीडियो बना रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे वक्त वहीं थम गया हो.
हादसे में दबे ऋतिक नाम के युवक की सांसें रुक चुकी थीं. वह बेसुध पड़ा था. भीड़ ने मान लिया था कि अब कुछ नहीं हो सकता. लेकिन मां के लिए यह मानना नामुमकिन था. उसने बेटे को गोद में लिया, उसका चेहरा देखा और उसी पल तय कर लिया कि वह हार नहीं मानेगी. फिर मां ने जो किया उसने सब को चौंका दिया. 

बेटे की जिंदगी के लिए मां की 10 मिनट की जंग, सांसों दे कर बचाई जान
मां ने बिना किसी ट्रेनिंग के, सिर्फ ममता के सहारे बेटे को सीपीआर देना शुरू किया. मुंह से मुंह सांस दी, छाती पर दबाव बनाया. यह सिलसिला करीब 10 मिनट तक चला. हर पल उम्मीद और डर के बीच गुजर रहा था. मां की आंखों में आंसू थे, लेकिन हाथ नहीं रुके.

इस तरह से मौत के मुंह से लौटी जिंदगी
करीब दस मिनट बाद अचानक युवक के शरीर में हलचल हुई. उसकी सांसें लौटने लगीं. जो भीड़ कुछ देर पहले खामोश थी. वही हैरान रह गई मां ने बेटे को सीने से लगा लिया और बेटे को अपनी गोद में भर लिया. मौके पर पहुंची एम्बुलेंस से युवक को तुरंत इलाज के लिए ले जाया गया.

यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि एक मां के हौसले की कहानी है
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है. यह उस मां के जिगर और हिम्मत की कहानी है, जिसने हालात के आगे घुटने नहीं टेके. जब लोग तमाशबीन बने रहे, तब एक मां ने अपनी सांसों से मौत को चुनौती दी.

मां की ममता बनी सबसे बड़ी ताकत
यह घटना याद दिलाती है कि आपात स्थिति में सही कदम कितनी बड़ी जान बचा सकता है. मां की ममता, साहस और तुरंत लिया गया फैसला आज एक बच्चे की जिंदगी की वजह बन गया. 

(रिपोर्टर- मनुदेव)

 

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