scorecardresearch

PHD स्टूडेंट का WhatsApp वाला गैंग! लग्जरी गाड़ी... महंगी ज्वेलरी और जल्द अमीर बनने की चाह, इंश्योरेंस अधिकारी बन देशभर में करोड़ों का कांड

Baghpat News: बागपत में साइबर ठगी के एक ऐसे गैंग का खुलासा हुआ है, जिसकी कहानी सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. गैंग में एक PHD स्टूडेंट भी शामिल था और बाकी आरोपी भी पढ़े-लिखे बताए जा रहे हैं. ये इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर फोन करते पॉलिसी रिन्यूअल, बोनस और लैप्स पॉलिसी के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसा लाखों रुपए खातों में ट्रांसफर करा लेते थे. इस पूरे नेटवर्क का संचालन WhatsApp ग्रुप के जरिए किया जा रहा था. पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से इस गैंग के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

Advertisement
Members of a Cyber Fraud Gang Arrested in Baghpat Members of a Cyber Fraud Gang Arrested in Baghpat

साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बागपत में साइबर ठगी के एक ऐसे गैंग का खुलासा हुआ है, जिसकी कहानी सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. गैंग में एक PHD स्टूडेंट भी शामिल था और बाकी आरोपी भी पढ़े-लिखे बताए जा रहे हैं. ये इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर फोन करते पॉलिसी रिन्यूअल, बोनस और लैप्स पॉलिसी के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसा लाखों रुपए खातों में ट्रांसफर करा लेते थे. इस पूरे नेटवर्क का संचालन WhatsApp ग्रुप के जरिए किया जा रहा था. पुलिस ने जब गैंग के एक सदस्य को दबोचा तो WhatsApp ग्रुप में मैसेज फ्लैश हुआ- साथी पकड़ा गया है, मोबाइल तोड़ दो. फिलहाल पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से गैंग के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 

ऐसे फंसाते थे अपनी जाल में
दरअसल मामले की शुरुआत बागपत साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत से हुई. शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इंश्योरेंस पॉलिसी के रिन्यूअल/पॉलिसी संबंधी प्रक्रिया के नाम पर उससे करीब 2.88 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए. रकम वास्तविक इंश्योरेंस कंपनी के खाते में नहीं गई. इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस उन लोगों तक पहुंची, जो अलग-अलग शहरों से बैठकर पॉलिसीधारकों को फोन करते थे. आरोपी खुद को नामी इंश्योरेंस कंपनियों का अधिकारी या कर्मचारी बताकर लोगों को विश्वास में लेते थे. इसके बाद पॉलिसी लैप्स होने, रिन्यूअल कराने, बोनस मिलने, टैक्स या दूसरी प्रक्रिया के नाम पर रकम जमा कराने का दबाव बनाया जाता था. 

पहले पॉलिसीधारकों से जुड़ा डेटा करते थे हासिल 
पुलिस के अनुसार गिरोह पहले पॉलिसीधारकों से जुड़ा डेटा हासिल करता था. इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर लोगों को फोन किया जाता था. बातचीत के दौरान आरोपियों को पॉलिसी से जुड़ी जानकारी पहले से पता होती थी, जिससे सामने वाले को कॉल वास्तविक इंश्योरेंस कंपनी से आने का भरोसा हो जाता था. भरोसा बनने के बाद रिन्यूअल फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, टैक्स, बोनस या पॉलिसी दोबारा शुरू कराने के नाम पर रकम खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी. वहीं बागपत साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के मेरठ और गाजियाबाद से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. 

कई राज्यों में फैला था इस गिरोह का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक गिरोह के तार देश के कई राज्यों तक फैले थे. NCRP पोर्टल पर इसके खिलाफ 51 शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें करीब 1.20 करोड़ रुपए की ठगी का पता चला है. इस गिरोह की कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें पढ़े-लिखे युवा भी शामिल थे. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में एक पीएचडी छात्र निशांत कुमार भी शामिल है, जबकि कुछ आरोपी पूर्व में निजी बैंक और पेमेंट बैंक में काम कर चुके हैं. पुलिस का कहना है कि कम समय में ज्यादा पैसा कमाने और लग्जरी जिंदगी जीने की चाह में आरोपियों ने साइबर ठगी को कमाई का जरिया बना लिया.

और कौन-कौन लोग जुड़े हैं
पुलिस के मुताबिक गिरोह के ऑपरेशन का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. पुलिस जांच में आया कि WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल नेटवर्क के सदस्यों के बीच संपर्क और अपडेट के लिए किया जाता था. पुलिस के मुताबिक, जब गिरोह का एक सदस्य पकड़ा गया तो बाकी सदस्यों को सतर्क करने के लिए ग्रुप पर मैसेज किया गया और उन्हें अपने मोबाइल तोड़ने को कहा गया. इससे पुलिस को अंदाजा हुआ कि गिरोह में आपसी संपर्क के लिए बाकायदा एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को पॉलिसीधारकों का डेटा कहां से मिलता था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं. पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह से जुड़े मामलों के तार उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, लद्दाख और गोवा समेत कई राज्यों तक जुड़े मिले हैं. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्कॉर्पियो, एक बाइक, 16 मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं.

किसी अनजान को पैसे ट्रांसफर न करें
एसपी बागपत सूरज कुमार राय के मुताबिक, आरोपी जल्द पैसा कमाने के लिए साइबर फ्रॉड कर रहे थे. गिरफ्तार आरोपियों में पीएचडी छात्र के अलावा ग्रेजुएट और इंटर पास युवा तथा कुछ पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं. पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है. खासकर उन लोगों की जो कथित तौर पर पॉलिसीधारकों का डेटा उपलब्ध कराते थे. एसपी ने लोगों से अपील की है कि इंश्योरेंस पॉलिसी से संबंधित किसी भी काम के लिए अधिकृत कंपनी के एजेंट या आधिकारिक माध्यम का ही इस्तेमाल करें. किसी अनजान फोन कॉल पर भरोसा कर पैसे ट्रांसफर न करें. गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को एसपी की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम भी दिया गया है.