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क्या अब UPSC का क्रेज खत्म? बिहार के युवा किताबों की जगह सोशल मीडिया से कमा रहे पैसे, कमाई जान कर चौंक जाएंगे आप

आज से 20 साल पहले शायद ही किसी ने सोचा होगा कि लोग केवल मोबाइल से लाखों लाख रुपए कमाएंगे. खास कर बिहार जैसे राज्य में, जहां के युवा UPSC नहीं तो कोई भी सरकारी नौकरी पर निर्भर थे. आज भी कई ऐसे छात्र हैं जो केवल सरकारी नौकरी को ही अपनी जिंदगी को बेहतर करने का जरिया मानते हैं. वहीं आज के 11-11 हजार वाले सोशल मीडिया वाले फॉलोवर्स ने अपनी कमाई और लाइफस्टाइल से इस सोच पर भी सवाल खड़ा कर दिया है.

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एक समय था जब बिहार के युवाओं के सपनों का मतलब होता था UPSC, इंजीनियरिंग या सरकारी नौकरी. पटना से लेकर छोटे शहरों तक हजारों युवा बेहतर करियर की तलाश में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु का रुख करते थे. लेकिन अब यहां की तस्वीरें बदलती दिखाई दे रही है. स्मार्टफोन, सस्ता इंटरनेट कनेक्शन और सोशल मीडिया की पहुंच ने युवाओं के लिए कमाई और पहचान बनाने का एक नया रास्ता खोल दिया है. बिहार अब सिर्फ अफसर को ही नहीं, बल्कि डिजिटल क्रिएटर्स को भी तैयार कर रहा है. जहां क्रिएटर्स 11 हजार फॉलोवर्स के साथ हजारों रुपए कमा रहे हैं. लेकिन सवाल अभी भी वही कि कैसे? आइए समझते हैं.

कंटेंट क्रिएशन बना युवाओं का नया करियर विकल्प
25 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर आयशा वत्स इस बदलाव की बड़ी मिसाल हैं. आयशा कहती हैं कि पहले माना जाता था कि अच्छे अवसर सिर्फ बड़े शहरों में मिलते हैं, लेकिन अब कंटेंट की क्वालिटी लोकेशन से बड़ी हो चुकी है. करीब 18 हजार इंस्टाग्राम फॉलोअर्स वाली आयशा आज कंटेंट क्रिएशन के जरिए लगभग 80 हजार रुपए हर महीने में कमा रही हैं. उनकी कहानी उन हजारों युवाओं की कहानी बनती जा रही है, जो बिहार में रहकर ही डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और नाम के साथ कमाई भी करना चाहते हैं.

बिहार में तेजी से बढ़ रही क्रिएटर इकोनॉमी
अब युवा सिर्फ UPSC या किसी सरकारी नौकरी के प्रतियोगी परीक्षाओं के पीछे नहीं भाग रहे हैं. बल्कि नए करियर को चुन रहे हैं. वह फूड, फैशन, एजुकेशन, कॉमेडी, लोक संस्कृति, स्टोरीटेलिंग और स्थानीय अनुभवों को कंटेंट के रूप में लोगों के आगे पेश करते हैं और लोग उन्हें पसंद भी करते हैं. इस छोटे फॉलोवर्स वाले अकाउंट खास कर एक मिसाल बनकर नए युवाओं के आगे पेश हो रहे हैं.

Kofluence Annual Research Report 2025-26 के अनुसार टियर-3 और टियर-4 शहर अब 43 से 48 प्रतिशत इंफ्लुएंसर अब सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा बन रहे हैं. सोचने वाली बात ये है कि छोटे-छोटे शहरों के क्रिएटर्स को मेट्रो शहरों के क्रिएटर्स के मुकाबले ज्यादा एंगेजमेंट मिलता है और इनके ऑडिएंश भी लॉयल होते हैं जो बार-बार रुक कर इनका कंटेंट देखते हैं.

कम फॉलोअर्स, फिर भी अच्छी कमाई
ये क्रिएटर्स उदाहरण हैं कि कैसे आज कंटेंट क्रिएशन में सफलता सिर्फ लाखों फॉलोअर्स की जरूरत नहीं होती है, बल्कि कंटेंट ही किंग है. अनुष्का राज के इंस्टाग्राम पर करीब 7 हजार फॉलोअर्स हैं, लेकिन वह हर महीने लगभग 28 हजार रुपए की कमाई कर रही हैं. उनका कहना है कि बिहार में अब ब्रांड्स स्थानीय क्रिएटर्स के साथ ज्यादा काम करना पसंद करती हैं.

वहीं नितिका कुमारी ने बिहारी खानपान और संस्कृति को दिखाने के लिए कंटेंट बनाना शुरू किया था. कुछ ही महीनों में उनके 11 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए और आज वह करीब 50 हजार रुपए प्रति माह कमा रही हैं.

बिहार की सबसे बड़ी ताकत है ऑरिजनल कंटेंट
रिपोर्ट के मुताबिक 49.2 प्रतिशत क्रिएटर्स का मानना है कि दर्शक हाई-प्रोडक्शन वीडियो से ज्यादा ऑरिजनल और सिंपल कंटेंट देखना पसंद करती है. वहीं 62 प्रतिशत से अधिक क्रिएटर्स को अब स्थानीय भाषाओं और बोलियों में कंटेंट बनाने के लिए ब्रांड्स से काम मिल रहा है. क्रिएटर अमित परिमल का कहना है कि लोग उनसे इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि वह उसी भाषा में बात करते हैं जो आम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में बोलते हैं. यही जुड़ाव भरोसा पैदा करता है. जो कंटेंट बनाने में उनकी सबसे बड़ी ताकत बनता है.

अवसर बड़ा है, लेकिन चुनौतियां भी मौजूद हैं
हालांकि कंटेंट क्रिएशन आसान कमाई का रास्ता नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार 10 में से 9 क्रिएटर्स अभी भी पूरी तरह सोशल मीडिया से होने वाली कमाई पर निर्भर नहीं हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत, धैर्य और बदलते ट्रेंड्स के साथ खुद को अपडेट रखना भी जरूरी है. कंटेंट क्रिएशन नौकरी नहीं, बल्कि एक तरह का बिजनेस है, जिसमें जितने अवसर हैं, उतने ही जोखिम से भरे भी हैं. 

कितनी हो सकती है कमाई?
फिलहाल बिहार के कुछ क्रिएटर्स की मासिक कमाई इस प्रकार है-
आयशा वत्स- लगभग 80,000 रुपए प्रति माह
नितिका कुमारी- लगभग 50,000 रुपए प्रति माह
अनुष्का राज- लगभग 28,000 रुपए प्रति माह

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक टिकने और लोगों को जोड़ने के लिए ब्रांड डील, एफिलिएट मार्केटिंग, कम्युनिटी प्रोडक्ट्स और लाइव सेशन जैसे कई आय स्रोत बनाने पड़ते हैं. एक हमारे पिता और चाचा का दौर था जब युवा कोचिंग, नोट्स और फिर कड़ी मेहनत के बाद सरकारी नौकरी के भरोसे अपना भविष्य बनाना चाहते थे. आज वही युवा मोबाइल कैमरे, सोशल मीडिया और अपनी क्रिएटिविटी के दम पर सोशल मीडिया पर नए अवसर तलाश रहे हैं. अगर अब आप पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे शहरों में जाएंगे तो अब आपको वहां सिर्फ UPSC अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि नए दौर के डिजिटल क्रिएटर्स भी भी मिलेंगे, जिन्होंने अपने दम पर अपनी नई कहानी लिखी. बिहार अब सिर्फ प्रतिभा बाहर नहीं भेज रहा, बल्कि देश को नई डिजिटल आवाजें भी दे रहा है.

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