Budget 2026
Budget 2026
देश के लोगों की नजरें नए साल की शुरुआत के साथ ही बजट (Budget) पर टिकी होती हैं. बजट से किसान से लेकर बिजनेसमैन तक, आम आदमी से लेकर नौकरी करने वाले तक, सभी को काफी उम्मीदें होती हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी. क्या आप जानते हैं कि बजट भले ही संसद में 1 फरवरी को पेश किया जाता है, लेकिन इसकी तैयारी अगस्त-सितंबर से ही शुरू हो जाती है. बजट बनाने वालों को 10 दिनों तक न मोबाइल पर बात करने और न ही घर जाने की इजाजत होती है. बजट बनाने में देश के बेहतरीन दिमाग दिन-रात काम करते हैं. आइए जानते हैं बजट बनाने के पर्दे के पीछे की पूरी कहानी.
बजट शब्द की कैसे हुई उत्पत्ति
बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द बौगेट से हुई है. बौगेट के मतलब चमड़े का एक छोटा थैला होता है. दरअसल, ब्रिटेन के वित्त मंत्री संसद में देश की आय-व्यय की फाइलें पेश करने पहुंचते थे तो वह उन फाइलों को एक चमड़े के थैले में रखकर लाते थे. वह जब फाइलों को निकालने के लिए चमड़े के थैले को खोलते थे तो संसद में लोग हंसी-मजाक में कहते थे बजट खुल गया. इस तरह से सरकारी खर्चों के विवरण के लिए यही बजट शब्द आधिकारिक बन गया. आपको मालूम हो कि हमारे देश में बजट घोषणा के दिन 2019 से पहले तक सभी वित्त मंत्री चमड़े के ब्रीफकेस में दस्तावेज लेकर जाते थे. यह भारतीयों को अंग्रेजों से विरासत में मिला था. मोदी सरकार ने साल 2019 से बजट दस्तावेजों को ले जाने के लिए इस ब्रीफकेस यानी अटैची को बही खाता से बदल दिया.
आखिर क्या होता बजट
हम जैसे घर का बजट बनाते हैं, वैसे ही सरकार पूरे देश का बनाती है. सरकार जो बजट तैयार करती है वह एक साल के आय-व्यय का लेखा-जोखा होता है. एक वित्तीय वर्ष में कितनी आमदनी होगी, कितना खर्च होगा और बचत कितनी होगी, यह सब बजट में शामिल रहता है. आपको मालूम हो कि संविधान में सीधे तौर पर बजट का उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण की चर्चा है. इस अनुच्छेद के अंतर्गत ही सरकार को अपने हर साल की कमाई और व्यय का लेखा-जोखा देना अनिवार्य होता है.
तीन प्रकार का होता है बजट
बजट तीन प्रकार का होता है. संतुलित बजट, अधिशेष बजट और घाटा बजट. बजट का वर्गीकरण इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार की ओर से वर्ष भर में अनुमानित खर्च अनुमानित प्राप्तियों के बराबर है, उससे कम है या अधिक है.
1. संतुलित बजट: एक वित्त वर्ष में जब सरकार की इनकम और खर्च के आंकड़े बराबर हों तो उसको संतुलित बजट यानी बैलेंस्ड बजट कहा जाता है.
2. सरप्लस बजट: एक वित्तीय वर्ष में जब अनुमानित आय अनुमानित व्यय से अधिक है तो बजट को अधिशेष या सरप्लस बजट कहा जाता है. इस प्रकार का बजट यह दर्शाता है कि सरकार की टैक्स से होने वाली आय, सरकार की ओर से पब्लिक वेलफेयर पर खर्च किए गए धन से अधिक है.
3. घाटे का बजट: बजट को घाटे वाला बजट यानी डेफिसिट बजट तब माना जाता है जब सरकार का अनुमानित खर्च उसकी राजस्व से प्राप्त आय से ज्यादा हो जाए.
बजट बनाने की कब से शुरू होती है तैयारी
लोकसभा में बजट 1 फरवरी को पेश किया जाता है लेकिन इसकी तैयारी अगस्त और सितंबर महीने से ही शुरू हो जाती है. वित्त मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स सभी मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर भेजकर पूछता है कि उन्हें अगले साल के लिए कितने पैसों की जरूरत है. उसी के आधार पर बजट तैयार किया जाता है.
कौन तैयार करता है देश का बजट
देश का बजट बनाने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (DEA) की होती है. इसके अलावा नीति आयोग और खर्च से जुड़े मंत्रालय भी शामिल होते हैं. वित्त मंत्रालय अलग-अलग मंत्रालयों के अनुरोध पर खर्च का एक प्रस्ताव तैयार करता है. इसके बाद बजट बनाने का काम DEA करता है. आखिर में वित्त मंत्रालय संशोधित बजट अनुमानों के आधार पर बजट भाषण तैयार करता है. बजट सरकार की बैलेंस शीट को दर्शाता है. यह लोगों को देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति के बारे में सूचित करता है.
बहुत ही गोपनीय होता है देश का बजट
वित्त मंत्रालय में बजट की छपाई से पहले एक परंपरा निभाई जाती है, जिसे हलवा सेरेमनी कहा जाता है. इसके बाद बजट बनाने से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं. बजट बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है. नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में रह रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को घर जाने तक इजाजत नहीं होती है. एक तरह से उन्हें नजरबंद रखा जाता है. ये पूरी दुनिया से 10 दिनों तक बेखबर रहते हैं. इन अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्त मंत्री का बजट भाषण होने के बाद ही नॉर्थ ब्लॉक से बाहर निकलने की अनुमति होती है. ऐसा इसलिए होता है ताकि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक न होने पाए. बजट दस्तावेज तैयार करने में जुड़े लोगों को मोबाइल, फोन, ई-मेल और इंटरनेट का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है.
इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी इनपर लगातार नजर बनाए रखते हैं. बजट बनाने की प्रक्रिया में कौन शामिल होगा, इसका खुलासा नहीं किया जाता है. पूरी जांच-पड़ताल के बाद करीब 100 अधिकारियों और कर्मचारियों को बजट दस्तावेज तैयार करने के लिए लगाया जाता है. उन्हें नॉर्थ ब्लॉक में एक गुप्त जगह पर रखा जाता है. बजट दस्तावेज तैयार करने के दौरान कोई अधिकारी और कर्मचारी यदि बीमार होता है तो उसे हॉस्पिटल जाने तक की इजाजत नहीं होती है. उन्हें इलाज करने के लिए डॉक्टरों की एक टीम तैनात रहती है. बजट संसद में पेश होने के 10 दिन पहले वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में इसकी छपाई होती है. प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वालों को दिए जाने वाले खाने की भी गहराई से जांच होती है. इस दौरान यदि किसी विजिटर का आना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में अंदर भेजा जाता है. मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से जाम रहता है. नॉर्थ ब्लॉक के प्रवेश और निकास द्वार पर CISF के अलावा दिल्ली पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी तैनात रहते हैं. बजट बनने के एक महीने पहले से ही वित्त मंत्रालय में मीडिया की एंट्री बंद हो जाती है.
क्या होता है ब्लू शीट
आपको मालूम हो कि ब्लू शीट बजट का सबसे प्रमुख दस्तावेज होता है. ब्लू शीट में बजट के मुख्य आंकड़े होते हैं. इस शीट को वित्त मंत्रालय के बाहर ले जाने की अनुमति किसी को नहीं होती. वित्त मंत्री भी इसे एक तय सीमा तक ही देख सकती हैं.
कब और कहां पेश होता है बजट
केंद्रीय बजट आम तौर पर देश के वित्त मंत्री 1 फरवरी को सुबह 11:OO बजे संसद में पेश करते हैं. पहले बजट फरवरी महीने के आखिरी में पेश किया जाता था. मोदी सरकार ने साल 2017 से इसकी तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी, ताकि नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले सारा काम पूरा हो सके. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी. यह उनका लगातार नौवां बजट होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब अपना पिटारा खोलेंगी, तो उसके पीछे महीनों की मेहनत और देश की आर्थिक दिशा को बदलने का विजन होगा.