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Ground Report: 'अगले जनम मोहे कबरई न दीजो'… वादे कागज पर, महोबा के कबरई में हर घर नल नहीं, हर घर 'नीला ड्रम'!

बुंदेलखंड के अधिकतर हिस्सों में भले ही सरकारी योजनाएं पहुंचने लगी हों लेकिन महोबा के कबरई नगर पंचायत के कई इलाकों में अभी तक न ही योजना पहुंची और न ही पानी कुछ पहुंचा है तो सालों से रोज़ सुबह आने वाले वाटर टैंकरों का वो इंतज़ार जो बुंदेलखंड के निवासियों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि, "अगले जनम मोहे बुंदेलखंड में जनम न दीजो"..

Bundelkhand water crisis Bundelkhand water crisis

बुंदेलखंड के अधिकतर हिस्सों में भले ही सरकारी योजनाएं पहुंचने लगी हों लेकिन महोबा के कबरई नगर पंचायत के कई इलाकों में अभी तक न ही योजना पहुंची और न ही पानी कुछ पहुंचा है तो सालों से रोज सुबह आने वाले वाटर टैंकरों का वो इंतज़ार जो बुंदेलखंड के निवासियों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि, "अगले जनम मोहे बुंदेलखंड में जनम न दीजो"..

आज तक मामले को ग्राउंड से समझने लखनऊ से साढ़े 5 घंटे की दूरी पर बसे महोबा के कबरई पहुंचा. कस्बे की महिलाएं अपने अपने घरों के बाहर तमाम बाल्टियां रखे एक ओर नजर किए बैठी हैं, इस इंतज़ार में कि अब पानी का टैंकर आएगा. टैंकर तो आज नहीं आता है लेकिन आज तक जरूर उनकी आवाज बनने मौके पर पहुंचता है.

एक महिला का कहना है कि सालों से यहां पानी नहीं पहुंचा है, योजनाएं केवल कागज पर हैं. इस उम्र में सिर पर बाल्टी रख कर घर के लिए पानी लाने दूर जाना पड़ता है. 

एक ने कहा कि टैंकर आते ही भीड़ लग जाती है, जिसके चलते कई बार आपस में लड़ाई भी हो जाती है. वह वृद्ध हैं तो कई बार वह बाल्टी लेकर जब तक पहुंचती हैं तो पानी खत्म हो जाता है. एक ने कहा कि अपने बच्चों से पानी भरवाना पड़ता है, बेटा नवीं कक्षा में है, वह पहले कंधे पर टांग कर भरी बाल्टी लाता है और फिर उसी कंधे पर किताबों से भरा हुआ भारी बसता लेकर स्कूल जाता है. 

एक ओर हीटवेव दूसरी ओर पानी की किल्लत
एक तरफ हीटवेव और बढ़ते तापमान के चलते गर्मी की मार दूसरी तरफ पानी की किल्लत. पूरा उत्तर भारत जिस वक्त गर्मी से कराह रहा है इन कबरई वासियों के लिए शायद गर्मी से बचने से ज्यादा जरूरी है पानी. कबरई के करीबी आधा दर्जन से ज्यादा मोहल्ले और लगभग 35 हजार की आबादी इस समस्या से परेशान है.

सूखा कबरई और खाली हैंडपंप
इस कस्बे में एक बात आम है कि यहां किसी घर में नल नहीं लगा है और न ही हैंडपंप. जब पाइपलाइन ही न बिछ पाई हो तो नल क्या ही करे. एक हैंडपंप जरूर लगा है लेकिन मात्र एक शोपीस मात्र.

जब नहीं मिला पानी, तो लगाया जुगाड़ वाला हैंडपंप
इंसानी अविष्कार अक्सर किसी चीज की कमी के चलते हो जाया करते हैं. कबरई में हालांकि कोई आविष्कार तो नहीं हुआ लेकिन एक जुगाड वाले हैंडपंप से अपनी मुसीबतो में कुछ कमी लाने का प्रयास जरूर हुआ. इस जुगाड वाले हैंडपंप को खिच्छु हैंडपंप कहते है. कस्बे में लोगों ने बताया कि दिन में आधे से एक घंटे के लिए सप्लाई का पानी आता है और इस बीच अगर बिजली चली जाए तो इस खिच्चू से पानी यह लोग अपनी बाल्टियों में भरने का काम करते हैं. लेकिन यह पूरे कस्बे के केवल दो से चार घरों में मौजूद है. एक घर में अगर खिच्छु चला तो आस पास के कुछ घर भी अपनी बाल्टियों लेकर पहुंच जाते है.

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एक 10 वर्षीय लड़का अपनी मां का हाथ बांटने के लिए पढ़ाई और स्कूल जाने की उम्र में आज तक संवाददाता के सामने ही 10 से ज्यादा बाल्टियां भर देता है. मौजूद महिला ने कहा एक हजार रुपये का यह खिच्चू ले लिया था, अब यह दिमाग लगाया जाता है कि कब बिजली जाएगी और कब पानी भरेंगे.

Pipeline है पर पानी नहीं, पानी के बिल हैं लेकिन समस्या का हल नहीं
इस कस्बे के इंद्रानगर इलाके में अगर देखा जाए तो जगह जगह पाइप तो लगे हैं लेकिन पानी नहीं है. एक व्यक्ति इस बीच 2025 में दिये पानी का बिल भी दिखाता है तो वही दूसरा व्यक्ति कहता है कि पानी तो दिया नहीं टैंकर भेजने का बिल ले रहे हैं. 

हर घर नल तो नहीं तो पर हर घर नीला ड्रम!
इंदिरानगर और राजेन्द्रनगर में हर घर नल तो नहीं पहुंच पाए लेकिन हर घर नीले ड्रम जरूर पहुंच गए. यहां हर घर के बाहर नीले रंग के ड्रम रखे हैं जिनमें आतंकी आने पर पानी भरा जाता है. क्राइम की कहानियों के बीच कम से कम यहां तो नीले ड्रम पानी भरने के काम आ रहे हैं. 

एक रात बिजली नहीं तो पानी का टैंकर नहीं
माननीयों के दफ्तर में अगर बिजली चली जाए और ac बंद हो जाए तो तुरंत ही इनवर्टर नहीं तो जनरेटर चल जाया करते हैं लेकिन आम जनता की हलक भले सूख जाए लेकिन उसके लिए बिजली जाने पर कोई बैकअप प्लान नहीं. बुंदेलखंड एक तमाम इलाकों में कल तेज़ आंधी आई जिसके चलते बिजली नहीं आई, नतीज न टैंकर भर पाए और न कबरई कस्बे में पहुंच पाए, महिलाओं की बाल्टियां खाली की खाली रह गईं, जो हिम्मत दिखा पाए दूर जाकर भर कर ले आए जो नहीं वो भीषण गर्मी में बंद बिजली में हलक सुखाये बैठे रहे. 

जहां पर वाटर टैंकर बोरिंग के जरिये भरे जाते हैं आज तक वहां भी पहुंचा, वाटर टैंकर तो थे लेकिन खाली. जल शक्ति विभाग के ऑपरेटर से पूछा तो उसने कहा बिजली नहीं आई भर नहीं पाए, इसके अलावा कोई बैकअप नहीं, जनरेटर होता तो भर सकता था लेकिन वो है नहीं.

2020 में हुआ शिलान्यास, अब तक ठप पड़ी पानी की टंकी
शायद अगर दो बार के रिपीटेड बीजेपी विधायक की विधायक निधि से बने कबरई के पानी की टंकी 2020 में हुए शिलान्यास के बाद चल गई होती तो कबरई कस्बे की आधी से ज्यादा पानी समस्या खत्म हो गई होती. यह टंकी अभी भी नहीं चल पाई है जबकि इसे बने 5 से 6 साल हो गए. इतना ही नहीं टंकी के बाहर शिलान्यास का शिलापट्ट भी लगा है. कुछ लोगों का कहना है कि यह चुनावी के लुभावने वादों में से एक है, यह चल गई तो चुनावी मुद्दा भी खत्म हो जाएगा. 

कई कस्बे में लोगों का यह भी कहना है कि नेता नगरी आती है और वोट मांगकर, पानी की समस्या हल करेंगे बोलकर वोट लेते हैं और फिर भूल जाते हैं। सरकारें आई और गई लेकिन कबरई के कई मोहल्लों में पानी नहीं आ पाया। 

महोबा के कबरई नगर पंचायत के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) संजीव कुमार ने बताया कि जल्दी ही यहां की समस्या खत्म हो जाएगी तब तक लगातार पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं. उनका कहना है कि पानी की टंकी एक महीने में बनकर तैयार होने वाली है उसके बाद पानी पहुंचेगा. उनका कहना है कि कबरई के मोहल्लों में पानी का जलस्तर बहुत नीचे है जिसके चलते वहां नल या हैण्डपंप काम नहीं करता. उन्होंने जल शक्ति के XCN से सम्पर्क साधकर जल्दी ही समाधान निकालने का वादा किया.

तो वहीं, शिवध्यान पांडे, उपजिलाधिकारी भी कबरई की मुसीबत को मानते है और कहते है कि पानी की टंकी जल्दी ही शुरू होगी जिससे स्थाई समाधान होगा तब तक पानी के टैंकर पहुंच रहे हैं. 

कबरई नगर पंचायत के अंतर्गत कुल 5,178 आधिकारिक घर (Households) रजिस्टर्ड हैं. (वर्तमान अनुमानित आबादी लगभग 35,000 से 40,000 है, जिसके हिसाब से धरातल पर अब परिवारों/घरों की संख्या लगभग 6,500 से अधिक हो चुकी है) सरकारी कागजों और जल संस्थान की पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक कबरई कस्बे में कुल 1,665 वैध घरेलू नल कनेक्शन (Domestic Connections) देने का दावा है.

राज्य सेक्टर कार्यक्रम के तहत कबरई नगर पुनर्गठन पेयजल योजना के जरिए ₹21 करोड़ का भारी-भरकम बजट पास हुआ था, जिसका उद्देश्य कस्बा क्षेत्र के नए ओवरहेड टैंक (पानी की टंकी) और पाइपलाइन बिछाकर शत-प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाना था. कागज़ी दावों के अनुसार भी देखें तो कुल 5,178 रजिस्टर्ड घरों में से केवल 1,665 में कनेक्शन का दावा है, यानी सरकारी रिकॉर्ड में ही 3,500 से अधिक घरों में आधिकारिक नल कनेक्शन बाकी हैं.