floating solar power plant
floating solar power plant
सिटी ब्यूटीफ्यूल चंडीगढ़ में उत्तर भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना (Floating water solar panel) की शुरुआत की गई है. इस परियोजना से carbon footprint को घटाने में कमी तो आएगी ही साथ में साल में न्यूनतम 35 लाख यूनिट (kWh) सौर ऊर्जा भी उत्पन्न करेगा. यह उत्तर भारत की तैरती सबसे बड़ी परियोजना है जोकि चंडीगढ़ के सेक्टर 39 और धनास झील पर बनाई गई है. सेक्टर 39 के वाटरवर्क्स में 2MWp की उत्तर भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना और धनास में फव्वारों के साथ 500kWp की एक और परियोजना सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद करेगी.
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव देबेंद्र दलाई ने गुड न्यूज टुडे को बताया कि वन विभाग के सभी भवनों और कार्यालयों की ऊर्जा जरूरतों को धनास झील, चंडीगढ़ में स्थापित परियोजना के माध्यम से पूरा किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि वाटर वर्क्स, सेक्टर-39, चंडीगढ़ में स्थापित 2000kWp फ्लोटिंग एसपीवी पावर प्लांट से उत्पन्न राजस्व का 70% सरकार में जमा किया जाएगा. कोषागार और शेष 30% नगर निगम, चंडीगढ़ को दिया जाएगा.
वाटर वर्क्स, सेक्टर -39 में 2000kWp फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट को 10 साल के ओ एंड एम सहित 11.70 करोड़ रुपये की कुल लागत पर स्थापित किया गया है और 500kWp फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट धनास झील, चंडीगढ़ में कुल लागत पर स्थापित किया गया है.
इन परियोजनाओं को क्रेस्ट (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी), यूटी चंडीगढ़ द्वारा डिजाइन और निष्पादित किया गया है और 20% मॉड्यूल दक्षता के साथ प्रति वर्ष न्यूनतम 35 लाख यूनिट (kWh) सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा.