वापस से शुरू हुई चार धाम यात्रा
वापस से शुरू हुई चार धाम यात्रा
उत्तराखंड में मौसम साफ होने के साथ ही चार धाम यात्रा शुक्रवार को शुरू हो गई. जिसके बाद ऋषिकेश शिविर से 16 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने तीर्थयात्रा शुरू की. सूत्रों के मुताबिक बद्रीनाथ की ओर जाने वाली सड़क की मरम्मत कर दी गई है और हेलीकॉप्टर सेवा भी बहाल कर दी गई है.
मुख्यमंत्री ने लिया हालातों का जायजा
इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डुंगी गांव का दौरा किया और भूस्खलन की घटना के बाद लापता लोगों के परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी. धामी ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया. गांव के दो लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.
बहाल हुई बस सेवाएं
तीर्थयात्री सुबह से ही ऋषिकेश चार धाम बस टर्मिनल और हरिद्वार बस स्टेशन से तीर्थ यात्रा के लिए निकलते दिखाई दिए. राज्य सरकार के मुताबिक देवस्थानम बोर्ड और पुलिस विभाग तीर्थयात्रियों की मदद में जुटा हुआ है. पुलिस चौकी यात्रा बस टर्मिनल, ऋषिकेश, लाउडस्पीकर के माध्यम से यात्री-सूचना की घोषणा कर रहा था.
केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध
ऋषिकेश बस टर्मिनल पर तीर्थयात्रियों के नि:शुल्क आरटी-पीसीआर परीक्षण का इंतजाम किया गया है. उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौर ने कहा कि केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थयात्रा जारी है, जबकि केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि सभी धामों में मौसम ठंडा था, शुक्र है कि अब बारिश नहीं हो रही है. बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 20 नवंबर को बंद होंगे, वहीं गंगोत्री के 5 नवंबर को, जबकि केदारनाथ और यमुनोत्री 6 नवंबर को बंद होंगे.
बचाव कार्य में लगी हैं आपदा प्रबंधन टीमें
उत्तराखंड में 17 से 19 अक्टूबर तक भारी बारिश के कारण आई बाढ़ ने अब तक 65 लोगों की जान ले ली है, 3,500 लोगों को बचाया गया है जबकि 16,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की सत्रह टीमें, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की सात टीमें, प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) की 15 कंपनियां और 5,000 पुलिस कर्मी बचाव और राहत कार्यों में लगे हुए हैं.
राज्य को पहले ही 250 करोड़ रुपये का आपदा कोष उपलब्ध कराया जा चुका है जिसका उपयोग राहत कार्यों के लिए किया जा रहा है. बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीम भेजने का फैसला किया है. सरकार ने आश्वासन दिया है कि बंद पड़ी बिजली लाइनों को जल्द से जल्द बहाल कर दिया जाएगा. राज्य सरकार ने कहा कि जैसे ही भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया, राज्य और जिला स्तर पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (Incident response system) सक्रिय हो गए और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया.