accused teacher was sentenced in court
accused teacher was sentenced in court
बलौदा बाजार के एक स्कूल में बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी देना 9 नाबालिग छात्राओं के साथ हुए उत्पीड़न के मामले का खुलासा करने की वजह बना. इसके बाद अब पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम टीकावन स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में पदस्थ प्रभारी प्रधान पाठक तिलक राम वर्मा को विशेष पॉक्सो न्यायालय ने 6 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है. मामले में विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने प्रभावी पैरवी की. प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) गिर्जेश प्रताप सिंह की अदालत में हुई.
और डरकर भाग गई छात्रा
अभियोजन के अनुसार, आरोपी शिक्षक तिलक राम वर्मा ने एक नाबालिग छात्रा को उसके पिता का हालचाल पूछने के बहाने अपने स्टाफ रूम में बुलाया था. बातचीत के दौरान आरोपी ने छात्रा की पीठ और कमर पर हाथ फेरते हुए उसके सीने को छूना शुरू कर दिया. इस हरकत से डरकर छात्रा वहां से भाग गई.
मामले का खुलासा 12 दिसंबर 2024 को हुआ, जब स्कूल की एक शिक्षिका ने छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी दी. शिक्षिका ने बच्चों से पूछा कि क्या उनके साथ भी किसी ने इस तरह की हरकत की है. इस पर पीड़ित छात्राओं ने अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी शिक्षिका और अपनी मां को दी. अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक द्वारा उनके साथ इसी तरह की हरकत किए जाने की जानकारी दी. इसके बाद शिक्षिका सभी पीड़ित छात्राओं को लेकर पलारी थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.
इतने साल की मिली सजा
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 75(1), पॉक्सो एक्ट की धारा 8 एवं 9(एफ) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) (क) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की. जांच पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 28 साक्षियों के बयान दर्ज कराए गए. न्यायालय ने आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 74 के तहत 9 बार, धारा 75(1) के तहत 9 बार तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 8 एवं 9(एफ) के तहत आरोप विरचित किए। एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोप तय किए गए.
सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपराध प्रमाणित पाए जाने पर आरोपी को बीएनएस की धारा 74 एवं 75(1) के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 9(एफ) के तहत 6 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया. अभियोजन पक्ष ने कहा कि स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है. ऐसे स्थान पर बच्चों के साथ अपराध होने से समाज में भय उत्पन्न होता है. न्यायालय का यह निर्णय समाज में उत्पन्न भय को दूर करने में सहायक होगा.