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भारत-चीन सैनिकों की झड़प वाले इलाके में चीनी झंडा...... पैंगोंग झील क्षेत्र में पुल, जानिए सच्चाई

पिछले मई में लद्दाख में तनाव होने के बाद से इस क्षेत्र में 50,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है. लद्दाख ही नहीं, चीन पिछले एक साल में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा से लगे पूर्वी क्षेत्र में आक्रामक कदम उठा रहा है.रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे को हल करने के लिए, दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न स्तरों पर बातचीत में लगी हुई हैं.

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हाइलाइट्स
  • चीन ने किया है नया सीमा कानून लागू

  • बढ़ाई गई सैनिकों की संख्या

जून 2020 में भारत और चीन के सैनिकों में झड़प हुई थी. उसी गलवान घाटी के इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें चीनी सैनिक अपना झंडा फहराते हुए दिख रहे हैं. दावा है कि ये वीडियो नए साल का है और जिस जगह पर झंडा फहराया जा रहा है वह गलवान घाटी ही है. लेकिन सच्चाई ये है कि नए साल के मौके पर चीन ने यह झंडा गलवान घाटी के विवादित क्षेत्र में नहीं फहराया है.

 (फोटो: इंडिया टुडे)
(फोटो: इंडिया टुडे)

ओपन सोर्स सैटेलाइट इमेज और गूगल डेटा के अनुसार, चीन ने गलवान घाटी के अपने गैर विवादित हिस्से में झंडा फहराया है न कि गलवान में नदी के उस मोड़ के पास जहां पर भारत-चीन सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. 

कहां फहराया गया है झंडा (फोटो: इंडिया टुडे)
कहां फहराया गया है झंडा (फोटो: इंडिया टुडे)

चीन कर रहा है पुल का निर्माण 

हालांकि इतना जरूर है कि पिछले 2 महीने से चीन पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कर रहा है. निर्माण चीन वाले क्षेत्र में हो रहा है. ये पुल भारत और चीन को बांटने वाली, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से 25-30 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है. सोमवार को सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन लद्दाख की पैंगोंग झील के अपने कब्जे वाले क्षेत्र में एक पुल बना रहा है. गौरतलब है कि ये जगह क्षेत्र पिछले कई सालों से भारत और चीन के बीच टकराव का मुद्दा रहा है.

इसी जगह पिछले साल दोनों सेनाओं के बीच टकराव हुआ था, जिसमें कई सैनिक मारे गए थे और कुछ घायल हुए थे. जियो इंटेलिजेंस एक्सपर्ट डेमियन साइमन द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज पर इस पुल का निर्माण देखा जा सकता है.

चीन को मिलेगा पुल से फायदा 

भारत के सैनिक अगस्त 2020 में ही पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर महत्वपूर्ण कैलाश रेंज की चोटी तक पहुंच गए थे. जिससे भारतीय सैनिकों को रणनीतिक फायदा हुआ था. लेकिन अगर ये पुल बनता है तो इससे चीन को काफी मदद मिलेगी और उनके सैनिक आसानी से इस क्षेत्र में आ सकेंगे. 

चीन ने किया है नया सीमा कानून लागू 

आपको बता दें, चीन ने 1 जनवरी को अपना नया सीमा कानून लागू किया है, जिसके अंदर सीमा सुरक्षा, गांवों के विकास और सीमाओं के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कही गई है. कानून के लागू होने से ठीक पहले चीन ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदल दिए. हालांकि यह कानून विशेष रूप से भारत के लिए नहीं है, लेकिन इससे इतना अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन कुछ करने की तैयारी में है.  

बढ़ाई गई सैनिकों की संख्या 

पिछले मई में लद्दाख में तनाव होने के बाद से इस क्षेत्र में 50,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है. लद्दाख ही नहीं, चीन पिछले एक साल में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा से लगे पूर्वी क्षेत्र में आक्रामक कदम उठा रहा है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे को हल करने के लिए, दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न स्तरों पर बातचीत में लगी हुई हैं. 

(इनपुट- अभिषेक भल्ला/अंकित कुमार)
 

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