भगवंत मान ने शुरू की 'शुक्राना' यात्रा
भगवंत मान ने शुरू की 'शुक्राना' यात्रा
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी 'शुक्राना यात्रा' की शुरुआत श्री आनंदपुर साहिब स्थित तख्त श्री केसगढ़ साहिब से की. इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं. मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारे में माथा टेककर गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया और राज्य की खुशहाली के लिए अरदास की. उन्होंने कहा कि जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ का प्रकट हुआ था, वहीं से इस यात्रा की शुरुआत होना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है. यह यात्रा पूरी तरह से आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़ी हुई है.
क्या है 'शुक्राना यात्रा' का उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य परमात्मा का धन्यवाद करना है. उन्होंने कहा कि उन्हें यह अवसर मिला कि वे बेअदबी के मामलों में सख्त कानून लागू कर सके, जो लंबे समय से लोगों की मांग थी. उन्होंने कहा,'यह यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं है. यह सिर्फ गुरु साहिब का शुक्राना करने के लिए है, जिन्होंने हमें यह जिम्मेदारी सौंपी.' मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कानून भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाएगा और लोगों की आस्था की रक्षा करेगा.
बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026' एक ऐतिहासिक कानून है. यह सुनिश्चित करता है कि पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बेअदबी की घटनाएं केवल अपराध नहीं बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा थीं, जिनका उद्देश्य पंजाब की शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाना था. ऐसे में इस कानून का लागू होना बेहद जरूरी था. उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के तहत दोषियों को कड़ी और उदाहरण पेश करने वाली सजा दी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा अपराध करने की हिम्मत न करे.
गुरु साहिब के प्रति आस्था और जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब हर सिख के लिए पिता के समान हैं. इसकी पवित्रता बनाए रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि उन्हें यह सेवा गुरु साहिब की कृपा से मिली है. उन्होंने भावुक होकर कहा कि, 'हम तो सिर्फ माध्यम हैं. गुरु साहिब ने हमें यह जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है.'
यात्रा का कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 'शुक्राना यात्रा' 9 मई तक जारी रहेगी. इस दौरान वे कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर माथा टेकेंगे. इनमें तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान वे हर स्थान पर राज्य की शांति और 'सर्बत्त के भले' के लिए प्रार्थना करेंगे.
विरोधियों पर निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस कानून का विरोध करने वालों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल राजनीतिक कारणों से इस पवित्र मुद्दे का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग अपने निजी हितों के कारण इस मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं. वे जानते हैं कि जल्द ही उन्हें अपने कर्मों का फल मिलेगा.' मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस कानून के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों की भावनाओं को शांत करना है.
छोटे साहिबजादों की शहादत का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने लोकसभा सदस्य के कार्यकाल को याद करते हुए छोटे साहिबजादों की शहादत का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि उन्होंने संसद में इस विषय को उठाया था और इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देती रहेगी.
श्री आनंदपुर साहिब का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने श्री आनंदपुर साहिब के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहीं पर 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. यह दिन सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था. उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक दिन उनकी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ यह कानून पास किया, जो अपने आप में एक बड़ा संयोग है.
पवित्र शहरों को मिला दर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा दिया है. यह लंबे समय से लोगों की मांग थी. उन्होंने कहा कि इन शहरों के विकास के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी.
तीन तख्त पंजाब में
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन पंजाब में स्थित हैं. इनमें श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन धार्मिक स्थलों का महत्व न केवल पंजाब बल्कि पूरी दुनिया के सिख समुदाय के लिए बहुत बड़ा है.
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