DEMAND FOR TRADITIONAL BHATTIS
DEMAND FOR TRADITIONAL BHATTIS
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई कम होने से होटल और ढाबा संचालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. गैस की कमी के कारण लोग अब पारंपरिक भट्ठियों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. अचानक बढ़ी मांग के चलते भट्ठी बनाने वाले कारीगरों के पास रोजाना सैकड़ों ऑर्डर पहुंच रहे हैं. हालात यह हैं कि कारीगरों के लिए समय पर भट्ठियां तैयार करना मुश्किल हो गया है और दुकानों पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं.
लखनऊ के मवैया इलाके में भट्ठी बनाने वाले कारीगर रमेश प्रजापति बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में भट्ठियों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है. पहले जहां रोज कुछ ही ऑर्डर मिलते थे, वहीं अब एक दिन में ही 300 से 400 भट्ठियों के ऑर्डर मिल रहे हैं. लोग दो-तीन नहीं बल्कि एक साथ आठ-आठ भट्ठियां बनवाने का ऑर्डर दे रहे हैं. बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अतिरिक्त मजदूर भी लगा दिए हैं, लेकिन फिर भी समय पर सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है. फिलहाल एक भट्ठी की कीमत 2500 रुपये से ज्यादा हो चुकी है.
रमजान में होटल कारोबार पर बढ़ा दबाव
अमीनाबाद के होटल संचालक आलमगीर बताते हैं कि इस समय रमजान का महीना चल रहा है और इफ्तार के समय खाने-पीने की मांग काफी बढ़ जाती है. ऐसे में होटल चलाने के लिए कम से कम आठ भट्ठियों की जरूरत है, लेकिन अभी उनके पास केवल तीन भट्ठियां ही उपलब्ध हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ गया है और कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं.
भट्ठी न मिलने से बंद करने पड़े होटल
आलमबाग के होटल संचालक रमेश ने भी तीन भट्ठियों का ऑर्डर दिया था, लेकिन अभी तक उन्हें भट्ठियां नहीं मिल पाई हैं. ऐसे में वह चिंतित हैं कि बिना भट्ठी के होटल का काम कैसे चलेगा. वहीं रकाबगंज के होटल संचालक सुरेश का कहना है कि उन्होंने दो दिन पहले भट्ठी का ऑर्डर दिया था, लेकिन अभी तक तैयार नहीं हो पाई है. मजबूरी में उन्हें अपना होटल बंद रखना पड़ा है. उनका कहना है कि जैसे ही भट्ठी मिलेगी, तभी वह दोबारा होटल का काम शुरू कर पाएंगे. गैस सिलेंडरों की कमी और पारंपरिक भट्ठियों की बढ़ती मांग ने फिलहाल लखनऊ के होटल कारोबारियों और कारीगरों दोनों को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है.
रिपोर्टर:
ये भी पढ़ें: