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हाईवे पर रिवर्स लेते ही चली गई 4 लोगों की जान! आखिर भारत में लोग सड़क नियमों को हल्के में क्यों लेते हैं, विदेशों में क्यों नहीं होती ऐसी गलती?

एक्सप्रेसवे तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाए जाते हैं. यहां वाहन सामान्य सड़कों की तुलना में कहीं अधिक गति से चलते हैं. अगर कोई वाहन अचानक रुक जाए या रिवर्स लेने लगे तो पीछे से आने वाले चालक के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा.(Photo: Screengrab) दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा.(Photo: Screengrab)
हाइलाइट्स
  • एक्सप्रेसवे पर रिवर्स लेना क्यों सबसे खतरनाक गलती है?

  • हाईवे पर रिवर्स लेते ही चली गई 4 लोगों की जान

सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भीषणसड़क हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई. सभी हरियाणा के रहनेवाले थे, वे दर्शन करने हरिद्वार जा रहे थे. अब इस हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि कार ड्राइवर एक्सप्रेसवे पर अपना कट निकल जाने के बाद हाईवे पर ही रिवर्स लेने लगा. तभी पीछे से तेज रफ्तार एसयूवी ने कार को टक्कर मार दी.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर जबरदस्त एक्सीडेंट
प्रत्यक्षदर्शियों और एनएचएआई पेट्रोलिंग टीम के अनुसार, टियागो चालक ने वाहन पीछे करते समय डिपर या कोई चेतावनी संकेत नहीं दिया था. दूसरी ओर स्कॉर्पियो की रफ्तार भी काफी अधिक थी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि टियागो कार दो बार डिवाइडर से टकराई. लगभग 300 मीटर तक घिसटने के बाद पलट गई.

सवाल यह है कि आखिर भारत में लोग एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड रास्तों पर भी नियम तोड़ने से क्यों नहीं डरते, जबकि कई दूसरे देशों में ऐसा करना बेहद दुर्लभ है?

एक्सप्रेसवे पर रिवर्स लेना क्यों सबसे खतरनाक गलती है?
एक्सप्रेसवे तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाए जाते हैं. यहां वाहन सामान्य सड़कों की तुलना में कहीं अधिक गति से चलते हैं. अगर कोई वाहन अचानक रुक जाए या रिवर्स लेने लगे तो पीछे से आने वाले चालक के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है. चाहे उसकी गाड़ी की ब्रेक कितनी भी अच्छी क्यों न हो, इतनी कम दूरी में दुर्घटना टालना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में एक्सप्रेसवे पर रिवर्स लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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भारत में लोग नियम तोड़ने का जोखिम क्यों उठाते हैं?
1. कुछ मिनट बचाने की मानसिकता:
कई लोग अगला यू-टर्न या निकास लेने के बजाय कुछ मिनट बचाने के लिए गलत दिशा में गाड़ी मोड़ देते हैं. उन्हें लगता है कि बस थोड़ा सा पीछे जाना है, लेकिन यही छोटी गलती जानलेवा बन जाती है.

2. नियम तोड़ने की आदत: भारत में अक्सर लोग रेड लाइट पार करना, गलत दिशा में चलना, हेलमेट या सीट बेल्ट न लगाना जैसी गलतियों को सामान्य मान लेते हैं. धीरे-धीरे नियम तोड़ना आदत बन जाता है.

3. कार्रवाई का डर कम: हाल के वर्षों में ई-चालान और कैमरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अब भी कई जगह लोगों को लगता है कि नियम तोड़ने पर शायद कोई कार्रवाई नहीं होगी. जब सजा का डर कम होता है, तो लापरवाही बढ़ जाती है.

4. सड़क सुरक्षा की जानकारी की कमी: कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि हाईवे पर रिवर्स लेना या अचानक रुकना कितना घातक हो सकता है. ड्राइविंग सीखते समय सड़क सुरक्षा के व्यवहारिक नियमों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता.

विदेशों में लोग नियम क्यों मानते हैं?

सख्त कानून और निश्चित सजा: अमेरिका, जापान, जर्मनी और कई यूरोपीय देशों में हाईवे पर गलत दिशा में चलना या रिवर्स लेना बेहद गंभीर अपराध माना जाता है. भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और कई मामलों में जेल तक हो सकती है.

कैमरों से लगातार निगरानी: विदेशों में अधिकांश एक्सप्रेसवे सीसीटीवी और ऑटोमैटिक कैमरों से लैस होते हैं. नियम तोड़ते ही चालान ऑटोमैटिक कट जाता है. इसलिए बच निकलने की संभावना बहुत कम रहती है.

बचपन से सड़क अनुशासन की शिक्षा: कई देशों में स्कूल स्तर से ही सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की शिक्षा दी जाती है. लोग नियमों को पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए मानते हैं.

सामाजिक जिम्मेदारी: विदेशों में नियम तोड़ना केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी गलत माना जाता है. इसलिए लोग दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर वाहन चलाते हैं.

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