Mobile Heat Relief Units
Mobile Heat Relief Units
दिल्ली में पड़ रही भीषण गर्मी और 45–46 डिग्री तक पहुंचते तापमान के बीच लोगों को राहत देने के लिए दिल्ली सरकार ने मोबाइल हीट रिलीफ यूनिट्स को सड़कों पर उतारा है. दावा किया गया कि ये यूनिट्स भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाकर लोगों को तुरंत राहत देंगी. हमारे संवाददाता सुशांत मेहरा ने राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में जाकर इन दावों की जमीनी हकीकत को परखा.
कश्मीरी गेट ISBT: राहत भी, भीड़ भी-
सबसे पहले टीम पहुंची राजधानी के सबसे व्यस्त ट्रांजिट पॉइंट कश्मीरी गेट बस टर्मिनल, यहां मोबाइल रिलीफ यूनिट तैनात मिली, जो रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक लोगों को राहत पहुंचा रही है. यूनिट पर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं. तेज धूप में सफर कर रहे यात्री, बस का इंतजार कर रहे लोग और मजदूर वर्ग सभी इस यूनिट के सहारे कुछ पल की राहत लेते नजर आए.
यूनिट में क्या मिल रहा है?
मोबाइल रिलीफ यूनिट से आम लोगों को क्या सुविधाएं मिल रही हैं. चलिए बताते हैं.
लाइन मे खड़े आम लोगों ने सरकार की इस पहल की सराहना की. कई यात्रियों ने कहा कि अगर ये यूनिट न हो, तो इस गर्मी में सफर करना मुश्किल हो जाए. हालांकि भीड़ ज्यादा होने के कारण कई लोगों को इंतजार भी करना पड़ा, जो यह दिखाता है कि जरूरत के मुकाबले संसाधन अभी भी सीमित हैं.
2 तरह के पानी उपलब्ध- अफसर
सरकार की इस महल को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट की तरफ से चलाया जा रहा है. दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट के ऑफिसर हरीश के मुताबिक वह रोजाना लगभग 500 लीटर पानी इस मोबाइल यूनिट के जरिए लोगों को डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं. जब यह वाटर टाइप खत्म हो जाता है तो उसको दोबारा रिपीट कराया जाता है. इस यूनिट में दो तरीके की पानी लोगों को उपलब्ध कराया जाता है. एक सिंपल पानी, दूसरा ओआरएस का पानी. पानी ठंडा होने के चलते लोग पानी का सेवन ज्यादा करते हैं.
आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन: बेहतर व्यवस्था, सक्रिय वॉलंटियर्स-
इसके बाद टीम आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के पास सर्विस रोड पर पहुंची, यहां भी एक मोबाइल रिलीफ यूनिट नजर आई.
यहां क्या खास था?
यहां स्कूल के बच्चे, महिलाएं और राहगीर लगातार यूनिट के पास आकर ठंडा पानी लेते नजर आए.
फिलहाल, ये यूनिट्स राजधानी में तपती सड़कों पर लोगों के लिए चलते-फिरते राहत केंद्र बन गई हैं, जहां कुछ घूंट ठंडा पानी और थोड़ी सी छांव लोगों को बड़ी राहत दे रही है.
(सुशांत मेहता की रिपोर्ट)
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