scorecardresearch

सर्दी से पहले ही दिल्ली की हवा हुई खराब, AQI 244 पर पहुंचा, GRAP-1 लागू लेकिन AQI बताने वाले कई डिस्प्ले बंद, सड़कों पर खड़ी मिलीं एंटी-स्मॉग गन

दिल्ली में सर्दियां अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई हैं, लेकिन हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा है। बुधवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 244 पर पहुंच गया.

Advertisement
Delhi Pollution (Photo/PTI) Delhi Pollution (Photo/PTI)
हाइलाइट्स
  • डिस्प्ले बंद, एंटी-स्मॉग गन भी खड़ी मिलीं

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का सीजन शुरू

दिल्ली में हर साल की तरह इस बार भी ठंड की आहट के साथ ही हवा जहरीली होने लगी है. राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सुधरने के बजाय तेजी से 'पुअर' (खराब) कैटेगरी में पहुंच गया है, जिसके बाद प्रशासन ने कमर कस ली है. हवा की खराब होती इस स्थिति को काबू करने के लिए पूरे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया है.

लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण के इस शुरुआती दौर में ही सरकारी व्यवस्था की पोल भी खुलने लगी है. कनॉट प्लेस और लोधी रोड जैसे प्रमुख इलाकों में लगे कई AQI डिस्प्ले बोर्ड बंद पड़े मिले, जो जनता को हवा की असल स्थिति बताने के लिए होते हैं.

डिस्प्ले बंद, एंटी-स्मॉग गन भी खड़ी मिलीं
प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बीच जमीन पर स्थिति कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है. जिन डिस्प्ले बोर्ड्स पर PM 2.5 और PM 10 का रियल-टाइम डेटा दिखना चाहिए था, वे कई जगहों पर खराब या बंद मिले. इतना ही नहीं, जिन एंटी-स्मोग गन को धूल और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए चौराहों पर तैनात होना चाहिए था, वे कई जगह पार्क की हुई पाई गईं. हालांकि, आईटीओ जैसे भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में पानी का छिड़काव करने के लिए मिस्ट फाउंटेन जरूर लगाए गए हैं जो रुक-रुक कर चलते हैं.

GRAP-1 के तहत क्या पाबंदियां लागू?
हवा की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने कई सख्त कदम उठाए हैं:

गाड़ियों पर लगाम: 1 नवंबर 2026 से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड गैर-BS-VI कमर्शियल गाड़ियों की एंट्री पर रोक रहेगी.

PUC सर्टिफिकेट जरूरी: बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा और बॉर्डर पर कड़ी निगरानी होगी.

सड़कों पर सफाई: धूल कम करने के लिए 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर उतारे गए हैं.

कंस्ट्रक्शन पर रोक: प्रदूषण नियंत्रण अवधि के दौरान खुले में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है.

खुले में आग जलाने पर पाबंदी: कचरा और सूखी पत्तियां जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.

वर्क फ्रॉम होम और पार्किंग: ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए वर्क-फ्रॉम-होम और बढ़ी हुई पार्किंग फीस का सुझाव दिया गया है.

पराली पर सियासत गर्म
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर किसानों से पराली जलवाने का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि केंद्र की ओर से प्रोत्साहन दिए जाने के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं. CAQM ने पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए NCR के अलावा पंजाब में भी टीमें तैनात की हैं. पंजाब में पराली जलाने के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं.

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भाजपा से हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर ध्यान देने को कहा है. पंजाब सरकार में मंत्री कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि राज्य सरकार पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रही है.

वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने बीजेपी के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि सिर्फ पराली को दिल्ली के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है. किसानों को आर्थिक मदद और एमएसपी (MSP) दी जानी चाहिए, लेकिन इस तरह की राजनीति से हवा साफ नहीं होने वाली.

मौसम भी बढ़ा सकता है परेशानी
मौसम का मिजाज भी इसके खिलाफ हो गया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाने-माने जलवायु वैज्ञानिक प्रोफेसर एस.के. ढाका का कहना है कि इस साल अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से नमी कम होगी और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) कमजोर पड़ जाएंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि सर्दियों में न तो समय पर बारिश होगी और न ही तेज हवाएं चलेंगी. हवा की गति कम होने की वजह से प्रदूषण के कण आसमान में ही लटके रहेंगे.

ये भी पढ़ें: