Ravana effigies drenched in Delhi rain
Ravana effigies drenched in Delhi rain
नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. राजधानी दिल्ली में दशहरे के दिन रावण दहन को लेकर तैयारी चल रही है. एशिया के सबसे बड़े रावण के पुतलों के बाजार ततारपुर में रावण बनाने का काम तेजी से चल रहा था लेकिन इस बीच सोमवार सुबह-सुबह हुई बे-मौसम बरसात की वजह से रावण के पुतले बनाने वाले को भारी नुकसान हुआ है. पार्क में रखे हुए पुतले बारिश के कारण गल गए, जिसको लेकर रावण के पुतले बनाने वाले कारोबारी बेहद परेशान हैं.
... तो फट जाएगा कागज
सुबह-सुबह हुई जबरदस्त बारिश की वजह से तैयार किए जा रहे रावण के पुतलों को भारी नुकसान हुआ है. पुतले के ऊपर लगाए गए कागज पूरी तरह से फट गए. इसे फिर से दुरुस्त करने की कवायद कारीगरों द्वारा की जा रही है. हालांकि कुछ रावण के पुतले तैयार भी हो गए थे और वह भी बारिश से गल गए. सबसे ऊपरी परत पर जो कागज लगाया जाता है उस पर पानी का असर कम होता है लेकिन बरसात के कारण उस पर होने वाले दूसरे काम बाधित हो गए हैं क्योंकि गीले कागज को अगर अभी कारीगर द्वारा छुआ जाएगा तो वह फट जाएगा.
पुतलों का भी हो इंश्योरेंस
पिछले 5 दशक से अधिक समय से पुतले बनाने का कारोबार से जुड़े कारोबारी का कहना है पिछले कुछ सालों से नवरात्रि के दौरान बरसात का चलन ऐसा शुरू हुआ है कि पुतलों का नुकसान भींगने से हो जाता है. इसके बाद फिर काम पूरा करने के लिए दिन-रात काम करना पड़ता है. कारीगर की कारीगरी इस वजह से अधिक देनी पड़ेगी जबकि खरीदने वाले इस नुकसान की भरपाई के लिए कतई तैयार नहीं होते. ऐसे में रावण के पुतलों के कारोबार से जुड़े कारोबारी की सरकार से मांग है कि उनके लिए कुछ ऐसी योजना लाई जाए, जिससे इन पुतलों का भी इंश्योरेंस हो ताकि नुकसान होने पर सरकार की तरफ से कुछ मुआवजा मिल सके. पुतले बनाने का कारोबार से जुड़े कारोबारी का कहना है सालों से चली आ रही हिंदुओं के इस परंपरा को जीवित रखने में वह अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में सरकार को ऐसी किसी भी स्थिति और आपदा में उनकी कुछ तो मदद करनी चाहिए.
50 फीट तक के बनाए जाते हैं रावण के पुतले
आपको बता दें कि वेस्ट दिल्ली के टैगोर गार्डन के ततारपुर में 5 फुट से लेकर 50 फीट तक के रावण के पुतले बनाए जाते हैं और यहां के पुतले न सिर्फ देश के अलग-अलग राज्यों में बल्कि विदेशों तक में जाते हैं. हालांकि इस बार विदेश से कोई आर्डर नहीं आए हैं लेकिन दिल्ली के अलावा हरियाणा, राजस्थान, यूपी सहित कई राज्यों से रावण के पुतलों का आर्डर आया है.
महंगाई ने भी तोड़ी कमर
ऊपर से इस कारोबार से जुड़े कारोबारी का यह भी कहना है कि इस बार पिछले साल के मुकाबले महंगाई ने भी पहले ही कमर तोड़ दी है क्योंकि पिछले साल इसे बनाने में जो बांस इस्तेमाल किया जाता है वह प्रति पीस डेढ़ सौ रुपए था जो इस बार बढ़कर ₹200 हो गया है. वहीं पुतले बनाने में जो कागज इस्तेमाल होते हैं उसकी कीमत भी पिछले साल के मुकाबले डेढ़ सौ से बढ़कर 180 और 190 रुपए प्रति किलो हो गई है. तार की कीमत भी पिछले साल के मुकाबले 75 रुपए से बढ़कर इस बार ₹90 से अधिक हो चुकी है. अरारोट की कीमत भी कहीं अधिक बढ़ गई है. ऊपर से रही सही कसर इस बरसात में पूरी कर दी. ऐसे में इस कारोबार से जुड़े कारोबारी की सरकार से मांग है कि नुकसान होने पर सरकार कुछ मुआवजा दे या पुतलों का इंश्योरेंस कराए.
(मनोरंजन कुमार की रिपोर्ट)