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मोबाइल लत और कम्युनिकेशन गैप बना रहा युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

आज लगभग हर उम्र के लोगों के पास मोबाइल की आसान पहुंच है, लेकिन यह तय करने वाला कोई नहीं है कि कौन क्या देख रहा है. वेब सीरीज और फिल्मों में दिखने वाली हिंसा, गाली-गलौज और असामान्य व्यवहार धीरे-धीरे युवाओं के लिए सामान्य बनते जा रहे हैं.

Digital addiction & communication gaps Digital addiction & communication gaps

तेजी से बढ़ते मोबाइल उपयोग और वेब सीरीज के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार में कम होता संवाद, डिजिटल लत और मानसिक दबाव युवाओं को गंभीर मानसिक समस्याओं की ओर धकेल रहे हैं. ऐसे मामलों को सामान्य व्यवहार नहीं, बल्कि एक मानसिक बीमारी के रूप में समझने की जरूरत है.

मोबाइल और वेब कंटेंट का बढ़ता असर
विशेषज्ञों के अनुसार आज लगभग हर उम्र के लोगों के पास मोबाइल की आसान पहुंच है, लेकिन यह तय करने वाला कोई नहीं है कि कौन क्या देख रहा है. वेब सीरीज और फिल्मों में दिखने वाली हिंसा, गाली-गलौज और असामान्य व्यवहार धीरे-धीरे युवाओं के लिए सामान्य बनते जा रहे हैं. जब कोई व्यक्ति लगातार ऐसी चीजें देखता है, तो वह उसके प्रति संवेदनशील नहीं रहता और कई बार उसी तरह के व्यवहार की ओर प्रेरित हो सकता है.

डिजिटल लत और मानसिक असंतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में बच्चे और युवा यह समझ ही नहीं पाते कि वे मोबाइल के आदी हो चुके हैं. वे जो सोचते हैं, उसी तरह का कंटेंट उन्हें बार-बार दिखने लगता है, जिससे उनकी सोच सीमित और नकारात्मक हो सकती है. इंटरनेट पर खतरनाक और गलत जानकारी तक आसानी से पहुंच भी मानसिक स्थिति को और खराब कर सकती है. ऐसी घटनाएं सामान्य मानसिकता का संकेत नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक असंतुलन का परिणाम होती हैं.

परिवार में कम्युनिकेशन गैप बड़ी वजह
परिवार में बढ़ता कम्युनिकेशन गैप भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं. केवल पढ़ाई को लेकर दबाव बनाना या डांटना सही तरीका नहीं है, क्योंकि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता. बच्चों को समझना, उनसे खुलकर बात करना और भावनात्मक सहयोग देना बेहद जरूरी है.

क्या करें माता-पिता?
विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता बच्चों की प्राइवेसी का सम्मान करते हुए उनके साथ समय बिताएं और उनकी मानसिक स्थिति पर ध्यान दें. यदि व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत किसी प्रशिक्षित मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लेनी चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है.

सरकार की पहल और हेल्पलाइन
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार ने भी कदम उठाए हैं. विभिन्न अस्पतालों में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर उपलब्ध हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 जारी की गई है, जिस पर कोई भी व्यक्ति कभी भी कॉल करके तुरंत परामर्श और सहायता प्राप्त कर सकता है.

(रिपोर्टर: समर्थ)

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