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कौन हैं एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी? जिन्होंने कोर्ट में लड़ी LGBTQ की लड़ाई, अब राज्यसभा में उठाएंगी देश की आवाज

भारत के संसदीय इतिहास में एक बेहद अहम पल दर्ज हुआ है. डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर देश की पहली ओपनली क्वीयर सांसद बनने का गौरव हासिल किया है.

1st Queer MP Menaka Guruswamy 1st Queer MP Menaka Guruswamy

डॉ. मेनका गुरुस्वामी आज देश की उन चुनिंदा हस्तियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने भारतीय संविधान की मूल भावना को अदालत में न सिर्फ समझा बल्कि उसे जिया भी है. सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट के रूप में उनकी पहचान तब राष्ट्रीय स्तर पर उभरी, जब वर्ष 2018 में उन्होंने उस ऐतिहासिक मुकदमे में अहम भूमिका निभाई जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को रद्द करवाया. इस फैसले ने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और LGBTQ समुदाय को संवैधानिक समानता की दिशा में सबसे बड़ा न्याय दिलाया. 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को आंशिक रूप से हटाए जाने के बाद मेनका गुरुस्वामी और उनकी साथी अरुंधति कातजू ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि वह दोनों एक कपल हैं. दोनों ने वर्षों तक इस कानून के खिलाफ संघर्ष किया था, जो आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध मानता था. 2019 में एक शो पर उन्होंने दुनिया के सामने अपनी रिश्ते का खुलासा किया.

राजनीतिक और संवेदनशील मामलों में भागीदारी
मेनका गुरुस्वामी टीएमसी की भी प्रमुख वकील रही हैं. उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप केस में टीएमसी की ओर से पैरवी की और हाल ही में I-PAC ऑफिस में ED की तलाशी से जुड़े मामले में भी पार्टी का पक्ष रखा. इन मामलों के कारण उन पर राजनीतिक कई आलोचनाएं भी हुईं.

सलवा जुडूम के खिलाफ महत्वपूर्ण केस
मेनका ने नंदिनी सुंदर की ओर से उस याचिका में भी वकालत की थी, जिसमें सलवा जुडूम को खत्म करने की मांग की गई थी. यह एक ऐसा सशस्त्र समूह था जिसे नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया था. यह केस छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ था और अंत में याचिकाकर्ताओं ने जीत हासिल की थी. 

शिक्षा और वैश्विक पहचान
मेनका गुरुस्वामी की शिक्षा बेहद प्रतिष्ठित संस्थानों से हुई है. उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया से डिग्री प्राप्त की थी. 

वह रोड्स स्कॉलर भी रह चुकी हैं और हार्वर्ड में गैमन फेलो के रूप में भी काम कर चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने येल लॉ स्कूल, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में भी विजिटिंग फैकल्टी के रूप में पढ़ाया.

2017 से 2019 के बीच वह कोलंबिया लॉ स्कूल में बी.आर. अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर इन लॉ रहीं, जहां उन्होंने संघर्ष के बाद उभरने वाली लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में संविधान निर्माण से जुड़े विषय बच्चों को पढ़ाया. 

सबसे प्रभावशाली हस्तियों की सूची में शामिल
मेनका, जो मीरा और मोहन गुरुस्वामी (पूर्व वित्त मंत्रालय सलाहकार) की बेटी हैं, 2019 में एक मैगजीन ने अरुंधति कातजू के साथ उन्हें 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया. उनकी सार्वजनिक प्रोफाइल के अनुसार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोड्स हाउस में उनका पोर्ट्रेट भी स्थापित किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.

 

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