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सपने के लिए छिपाए थे पैसे, लेकिन बाद में गया भूल कि कहां रखें... जब मिले नोट के बंडल, तो लग चुकी थी दीमक, बैंक ने भी किया बदलने से मना

किसान की भूलने की आदत उसे इतनी भारी पड़ी कि न तो उसका सपना पूरा हुआ, और उसके पैसों को भी दीमक खा गई. दरअसल प्लॉट बेचने के एवज में उसे पैसे मिले थे, जिसे उसने छिपा दिया था. जिसके बाद वह भूल गया कि उसने पैसे कहां छिपाए है, और जब वह मिले तो नोटों को दीमक खा चुकी थी.

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दीमक के खाए नोट दीमक के खाए नोट

राजस्थान के बालोतरा में एक किसान की भूलने की बीमारी ने उसे लाखों की चपेट लगवा दी. किसान ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी कमाई रद्दी में तब्दील हो जाएगी. दरअसल नेवाई गांव के निवासी किसान मांगीलाल मेघवाल ने करीब एक साल पहले अपना एक प्लॉट बेचा था. जिसके एवज में उन्हें पैसा मिले थे. लेकिन उन्होंने उन रुपयों को छुपा दिया. लेकिन, उनकी नशे की लत और भूलने की बीमारी के चलते वह भूल गए कि पैसा कहां छिपाया है. जबतक उन्होंने मामले की जानकारी परिवार को दी, तबतक बहुत देर हो चुकी थी.

पक्की कमरा का था किसान का सपना

मांगीलाल अपने खेत में बनी कच्ची ढाणी में अपने परिवार के साथ रहते थे. पचपदरा में स्थित अपने प्लॉट को बेचने के बाद वह अपने खेत में पक्का कमरा बनवाना चाहते थे. रुपए चोरी होने और फिजूल खर्ची से बचने के लिए उसने प्लॉट बेच कर मिले 5 लाख रुपए को एक पॉलीथिन में डालकर खेत में गड्ढा खोदकर गाड़ दिया था.

5 लाख के लिए खोजा डाला 10 बीघा का खेत

कुछ समय बाद जब उन्होंने पक्का कमरा बनाने के लिए रुपयों की जरूरत पड़ी, तो उन्होने खेत में छुपाए रुपयों की निकालने की सोची. लेकिन तब तक वह उस जगह को भूल चुके थे. उसने जगह-जगह खेत में रुपए खोजे, लेकिन उन्हें नहीं मिले. आखिरकार किसान ने अपनी पत्नी और बेटों को बताया. पहले तो परिजनों को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ. फिर परिवार ने भी जगह-जगह खेत की खुदाई कर पैसों की तलाश शुरू की. लेकिन, उन्हें भी रुपए नहीं मिले.

परिवार से उड़े होश, जब पैसे को लगी दीमक

करीब एक साल बाद जब बारिश हुई तो खेत में बुवाई का काम शुरू हुआ. इसी दौरान एक रात रुपयों से भरी पॉलीथिन की थैली बाहर निकल आई. रात के अंधेरे में परिवार ने उसे नहीं देखा. जब सुबह पत्नी और बेटा खेत की तारबंदी ठीक कर रहे थे तो उनकी नजर उस थैली पर पड़ी. जब पॉलीथिन की थैली को खोलकर देखा तो उनके होश उड़ गए. पॉलीथिन में दीमकों के साथ 500 -500 रुपए के नोट थे. लेकिन दीमक लगने से वह टुकड़े -टुकड़े हो चुके थे. यह देखकर परिवार की सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गई.

नोट बदलने के लिए बैंक ने किया इनकार

कटे-फटे नोटों को इकठ्ठा कर परिवार के लोग पचपदरा स्थिति एसबीआई बैंक पहुंचे. नोटों की हालत देखकर बैंक ने भी वह नोट लेने से साफ इनकार कर दिया. उसके बाद परिवार के लोग बालोतरा स्थित एसबीआई बैंक की मुख्य शाखा भी पहुंचे. लेकिन, वहां से भी उन्हें निराश होकर ही लौटना पड़ा. किसान की भूलने की आदत ने उसके परिवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.