गोबर से बना दीया
गोबर से बना दीया
सहारनपुर नगर निगम की आत्मनिर्भर गौशाला में तैयार किए गए गोबर के अनोखे दीपक अब अयोध्या राम मंदिर से लेकर देश की प्रमुख हस्तियों के आवास तक पहुंच चुके हैं. दीपावली के अवसर पर अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव के लिए इन दीपकों को राम मंदिर भेजा गया है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आवास पर भी ये दीपक शुभकामनाओं के साथ प्रेषित किए गए हैं. ये दीपक नगर निगम की ओर से गांव नवादा में संचालित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला में तैयार किए गए हैं. इस गौशाला में फिलहाल 575 गोवंश संरक्षित हैं. यहां गोबर और गोमूत्र से कई तरह के उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं, जिन्हें बेचकर भी लोगों तक पहुंचाया जाता है.
पानी में तैरते हैं गोबर से बने दीपक
गौशाला में गाय के शुद्ध देसी गोबर से तैयार इन दीपकों की खासियत इन्हें दूसरे दीपकों से अलग बनाती है. इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पानी में भी तैर सकते हैं. साथ ही, इस्तेमाल के बाद इन्हें कचरे में फेंकने की जरूरत नहीं होती. इन्हें गमलों या क्यारियों में डालने पर ये खाद के रूप में काम आते हैं. पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होने के कारण इन दीपकों की मांग देशभर से आती है. इनकी ऑनलाइन बिक्री भी होती है. गौशाला में सिर्फ दीपक ही नहीं, बल्कि गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, शमांराणी कप और धूपबत्ती जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं. इन सभी उत्पादों का विक्रय किया जाता है.
अयोध्या के दीपोत्सव के लिए भेजे गए 5100 दीपक
पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि दीपावली के अवसर पर सहारनपुर की गौशाला में तैयार किए गए 5100 दीपक अयोध्या भेजे जा चुके हैं. इनका इस्तेमाल रामनगरी में होने वाले दीपोत्सव में किया जाएगा, ताकि इस आयोजन में सहारनपुर के दीपक भी अपनी रोशनी बिखेर सकें. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आवास पर भी गोबर से बने दीपक शुभकामनाओं के साथ भेजे गए हैं.
स्वदेशी और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल
डॉ. संदीप मिश्रा के मुताबिक, नगर निगम का उद्देश्य स्वदेशी और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देना है. इसके लिए लोगों से अपील की गई है कि वे त्योहारों पर मिट्टी और गोबर से बने दीपकों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें. इससे दीपावली की खुशियों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी आगे बढ़ेगा. सहारनपुर की गौशाला में तैयार हो रहे ये उत्पाद गोबर के उपयोग का एक अलग तरीका सामने रखते हैं. खासकर ऐसे दीपक, जिन्हें जलाने के बाद खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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